अमेरिकी सीनेट में 86 बनाम 11 वोटों के भारी अंतर से पारित हो चुका ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट’ अब अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के समक्ष प्रस्तुत है। 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पूर्व सदन के अवकाश पर जाने में महज 4 कार्यदिवस शेष हैं, जिसके भीतर इस विधेयक पर अंतिम निर्णय लिया जाना अनिवार्य है। हाउस रूल्स कमेटी द्वारा सार्वजनिक किए गए संशोधनों ने इसके प्रावधानों को लेकर तीखी बहस छेड़ दी है।
ऊर्जा क्षेत्र और शैडो फ्लीट पर शिकंजा
इस कानून का मुख्य ध्येय रूसी नेतृत्व, उसके ऊर्जा तंत्र और तेल पाबंदियों को चकमा देने वाले जहाजों के गुप्त बेड़े यानी ‘शैडो फ्लीट’ पर कड़े प्रतिबंध लगाना है। वाशिंगटन का स्पष्ट मानना है कि मॉस्को अपने कच्चे तेल के कारोबार से प्राप्त राजस्व का इस्तेमाल यूक्रेन के विरुद्ध युद्ध में कर रहा है। इसी को रोकने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल व्यापार करने वाले शीर्ष साझेदारों पर 100% तक सीमा शुल्क लगाने का अधिकार देने का प्रावधान रखा गया है।
स्टेनी होयर का संशोधन: भारत-चीन का स्पष्ट नाम
डेमोक्रेटिक सांसद स्टेनी होयर द्वारा पेश संशोधन में भारत और चीन के अतिरिक्त तुर्की, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक गणराज्य, यूएई, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिज गणराज्य को सीधे तौर पर कानून के दायरे में शामिल करने की मांग की गई है। इससे पूर्व 7 अगस्त को सीनेट से पास मूल विधेयक में किसी देश का स्पष्ट नाम दर्ज करने के बजाय केवल आयतन के अनुसार तेल और गैस के 5 सबसे बड़े आयातकों का उल्लेख किया गया था।
ग्रेगरी मीक्स का विरोध: टैरिफ अधिकार समाप्त करने की मांग
दूसरी ओर, राष्ट्रपति को व्यापक सेकेंडरी टैरिफ अधिकार देने का विरोध कर रहे डेमोक्रेटिक सांसद ग्रेगरी मीक्स ने तीन सह-प्रायोजकों के साथ मिलकर विधेयक के सेक्शन 113 को पूरी तरह समाप्त करने का संशोधन पेश किया है। यह सेक्शन राष्ट्रपति को रूसी व्यापारिक साझेदारों पर टैरिफ लगाने का एकतरफा अधिकार प्रदान करता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा छूट और यूक्रेन को आर्थिक सहायता
सांसद मीक्स ने दो अन्य संशोधन भी पेश किए हैं। पहला प्रस्ताव राष्ट्रपति को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में किसी भी विदेशी संस्था या व्यक्ति पर लगे प्रतिबंधों को 90 दिनों के लिए हटाने (और इसे 90-90 दिनों के लिए आगे बढ़ाने) की शक्ति देता है। दूसरा प्रस्ताव यूक्रेन को रक्षा सामग्री तथा सेवाओं की खरीद हेतु 15 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष ऋण प्रदान करने का अधिकार देने की वकालत करता है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से पूर्व इन संशोधनों पर सदन की मुहर लगना अनिवार्य है।
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