पंजाब के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री चुन्नी लाल भगत का गुरुवार को 93 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से जालंधर के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार इस सदमे से उबर भी नहीं पाया था कि कुछ ही घंटों बाद उनके दामाद मोहनलाल भगत का भी निधन हो गया। मोहनलाल भगत सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त अधिकारी थे और कुछ दिन पहले ब्रेन हेमरेज के बाद निजी अस्पताल में भर्ती थे। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह ने वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री चुन्नी लाल भगत को श्रद्धांजलि अर्पित की।
ਸਾਬਕਾ ਮੰਤਰੀ ਅਤੇ ਜਲੰਧਰ ਦੇ ਸੀਨੀਅਰ ਆਗੂ ਸ੍ਰੀ ਚੁੰਨੀ ਲਾਲ ਭਗਤ ਜੀ ਦੇ ਦੇਹਾਂਤ ਦੀ ਦੁਖਦ ਖ਼ਬਰ ਮਿਲੀ…
ਪੰਜਾਬ ਕੈਬਨਿਟ ਵਿੱਚ ਮੇਰੇ ਸਾਥੀ ਮੰਤਰੀ ਮਹਿੰਦਰ ਭਗਤ ਜੀ ਦੇ ਉਹ ਸਤਿਕਾਰਯੋਗ ਪਿਤਾ ਜੀ ਸਨ। ਇਸ ਦੁੱਖ ਦੀ ਘੜੀ ਵਿੱਚ ਮੇਰੀਆਂ ਡੂੰਘੀਆਂ ਸੰਵੇਦਨਾਵਾਂ ਮਹਿੰਦਰ ਭਗਤ ਜੀ ਅਤੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਸਮੁੱਚੇ ਪਰਿਵਾਰ ਦੇ ਨਾਲ ਹਨ…
ਪ੍ਰਮਾਤਮਾ ਵਿਛੜੀ…— Bhagwant Mann (@BhagwantMann) September 10, 2026
सियालकोट से जालंधर तक संघर्ष से बनाई पहचान
चुन्नी लाल भगत का जन्म पाकिस्तान के सियालकोट में हुआ था। देश के विभाजन के बाद उन्हें भारत आना पड़ा और उन्होंने जालंधर को अपनी कर्मभूमि बनाया। विस्थापन के बाद उन्होंने मेहनत से अपना कारोबार खड़ा किया और खेल सामान के क्षेत्र में ‘शीला स्पोर्ट्स’ के जरिए पहचान बनाई। कारोबार के साथ उनका सामाजिक दायरा भी बढ़ता गया। जालंधर के कारोबारी, सामाजिक और खेल जगत से बने संपर्क आगे चलकर उनके राजनीतिक सफर की नींव बने। वर्ष 1985 में उन्होंने पहली बार जालंधर दक्षिण विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें जीत नहीं मिली। इसके बाद भाजपा संगठन से उनका जुड़ाव मजबूत हुआ।
विधानसभा उपाध्यक्ष से कैबिनेट मंत्री तक पहुंचे
चुन्नी लाल भगत ने 1997 में भाजपा के टिकट पर जालंधर दक्षिण से चुनाव जीतकर पहली बार पंजाब विधानसभा में प्रवेश किया। वर्ष 2007 में उन्होंने इसी सीट से दोबारा जीत हासिल की। परिसीमन के बाद 2012 में उन्होंने जालंधर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और वहां भी विजयी रहे। उनके राजनीतिक प्रभाव का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2011 में उन्हें पंजाब विधानसभा का उपाध्यक्ष चुना गया। 2012 में वह भाजपा विधायक दल के नेता भी बने। उसी वर्ष प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व में बनी अकाली-भाजपा सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी मिली। उन्होंने स्थानीय निकाय, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान समेत कई विभाग संभाले। बाद में वन एवं वन्यजीव संरक्षण और श्रम विभाग की जिम्मेदारी भी उनके पास रही।
बेटे ने आगे बढ़ाई विरासत
चुन्नी लाल भगत के बेटे मोहिंदर भगत ने भी जालंधर पश्चिम की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। बाद में उन्होंने आम आदमी पार्टी का रुख किया और 2024 के जालंधर पश्चिम विधानसभा उपचुनाव में पार्टी के टिकट पर जीत हासिल की। इसके बाद उन्हें पंजाब सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया।गुरुवार को मोहिंदर भगत को एक ही दिन में दो बड़े पारिवारिक झटके लगे। सुबह उनके पिता चुन्नी लाल भगत ने जालंधर स्थित आवास पर अंतिम सांस ली। इसके कुछ समय बाद उनके जीजा मोहनलाल भगत का भी निधन हो गया। बताया जा रहा है कि मोहनलाल को कुछ दिन पहले ब्रेन हेमरेज हुआ था और निजी अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। दोनों निधन की खबर से परिवार और परिचितों में शोक का माहौल है।
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