विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर कहा है कि किसी भी साझेदारी में एक-दूसरे की प्रमुख चिंताओं को समझना जरूरी है। अमेरिका में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने आतंकवाद को भारत की बड़ी सुरक्षा चिंताओं में से एक बताया। जयशंकर ने कहा कि अगर भारत के किसी साझेदार को उसकी इस अहम चिंता की पर्याप्त समझ या कद्र नहीं है, तो इसका असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ सकता है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संबंधों को लेकर भारत में चर्चा हो रही है। हालांकि जयशंकर ने अपने बयान में किसी एक हालिया घटनाक्रम पर विस्तार से टिप्पणी करने के बजाय व्यापक तौर पर भारत की सुरक्षा चिंता और साझेदारों की भूमिका पर बात की।
एशिया सोसाइटी के कार्यक्रम में बोले विदेश मंत्री
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के हाई-लेवल हफ्ते के समापन के बाद सोमवार को जयशंकर ने एशिया सोसाइटी में आयोजित एक बातचीत में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में भारतीय-अमेरिकी समुदाय, प्रवासी भारतीयों और नीति विशेषज्ञों ने भी भाग लिया। चर्चा का संचालन एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के डिस्टिंग्विश्ड फेलो और पूर्व अमेरिकी राजनयिक डैनियल रसेल ने किया। रसेल ने जयशंकर से पिछले एक साल में व्यापार और टैरिफ से जुड़े घटनाक्रमों के बीच भारत-अमेरिका रिश्तों को लेकर सवाल किया। उनसे यह भी पूछा गया कि दोनों देशों के संबंधों को बेहतर दिशा में ले जाने के लिए किन बातों पर ध्यान देना होगा।
#WATCH | New York, USA: At the Asia Society event, External Affairs Minister Dr. S. Jaishankar says, "…you're dealing with China, you're dealing with Russia, with Ukraine, with other parts of Asia, with Europe… what people used to say about us, Washington is today practicing… pic.twitter.com/qPHXu5bgeH
— ANI (@ANI) September 29, 2026
आतंकवाद को बताया भारत की प्रमुख चिंता
जयशंकर ने कहा कि अमेरिका के साथ संबंधों में मुश्किलें सिर्फ भारत तक सीमित नहीं हैं और दुनिया के कई देशों के अमेरिका के साथ अपने-अपने जटिल मुद्दे रहे हैं। इसके बाद उन्होंने भारत के संदर्भ में आतंकवाद को विशेष रूप से महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। पाकिस्तान का नाम लिए बिना उन्होंने पड़ोसी देश से आने वाले आतंकवाद का संदर्भ दिया। जयशंकर ने कहा कि भारत ने दशकों तक ऐसे आतंकवाद का सामना किया है, जिसे उन्होंने पड़ोसी देश की सोची-समझी और जानबूझकर अपनाई गई नीति से जोड़ा।
साझेदार की चिंताओं की समझ जरूरी
भारत-अमेरिका संबंधों में सुधार के सवाल पर विदेश मंत्री ने कहा कि किसी साझेदार की उन चिंताओं को समझना और महत्व देना जरूरी है, जो उसके लिए मूलभूत हैं। उनके मुताबिक, यदि कोई साझेदार किसी प्रमुख चिंता को पूरी तरह नहीं समझता या उसकी पर्याप्त कद्र नहीं करता, तो इससे रिश्ते में समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
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