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अब युद्ध के मैदान में लेजर हथियार का इस्तेमाल कर रहा अमेरिका, ईरानी ड्रोन और क्रूज मिसाइल हो रहे तबाह

अमेरिकी सेना के लेजर हथियार अब प्रयोगशाला और परीक्षणों से आगे निकलकर वास्तविक सैन्य अभियानों में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। पेंटागन के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरानी ड्रोन और आने वाली क्रूज मिसाइलों को रोकने के लिए हाई-एनर्जी लेजर सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम ऑपरेशनल लागत बताई जा रही है।

बिजली से चलते हैं लेजर हथियार

पारंपरिक एयर डिफेंस में किसी लक्ष्य को रोकने के लिए इंटरसेप्टर मिसाइल दागनी पड़ती है, जिसकी कीमत लाखों डॉलर तक हो सकती है। इसके मुकाबले लेजर से एक लक्ष्य पर फायर करने का खर्च मुख्य रूप से बिजली की खपत तक सीमित रहता है। हाई-एनर्जी लेजर एक बेहद शक्तिशाली किरण को लक्ष्य पर केंद्रित करता है। कुछ समय तक किरण पड़ने से ड्रोन या मिसाइल की बाहरी संरचना और सेंसर क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, जिसके बाद वह काम करना बंद कर सकता है। सिस्टम को पर्याप्त बिजली मिलती रहे तो बार-बार फायर किया जा सकता है, इसलिए इसमें पारंपरिक हथियारों की तरह सीमित गोला-बारूद की समस्या नहीं होती।

होर्मुज से अमेरिकी सीमा तक इस्तेमाल

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में इस तकनीक का इस्तेमाल खास महत्व रखता है, क्योंकि यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां ड्रोन और कम ऊंचाई पर उड़ने वाली क्रूज मिसाइलों से खतरे की स्थिति में लगातार एयर डिफेंस की जरूरत होती है। लेजर सिस्टम कम लागत में कई लक्ष्यों से निपटने का विकल्प देता है। अमेरिका अपनी दक्षिणी सीमा पर भी इस तकनीक की उपयोगिता पर काम कर रहा है। वहां छोटे ड्रोन का इस्तेमाल ड्रग तस्करी और निगरानी के लिए किया जाता है। इन कम ऊंचाई वाले छोटे लक्ष्यों के खिलाफ लेजर सिस्टम का परीक्षण किया जा रहा है। सेना के मुताबिक, सटीक निशाना लगाने की क्षमता के कारण इससे आसपास के इलाके में नुकसान कम रखने की संभावना रहती है।

50 करोड़ डॉलर का ठेका

अमेरिकी सेना ने युद्ध के लिए तैयार हाई-एनर्जी लेजर सिस्टम विकसित करने के लिए करीब 50 करोड़ डॉलर का ठेका दिया है। यह निवेश बताता है कि अमेरिका इस तकनीक को भविष्य के एयर डिफेंस सिस्टम का हिस्सा बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इन सिस्टम को संचालित करने के लिए कुछ ऑपरेटरों द्वारा रीकॉन्फिगर्ड Xbox कंट्रोलर का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। ऐसे कंट्रोलर आसानी से उपलब्ध होने के साथ सैनिकों के लिए परिचित इंटरफेस देते हैं।

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Ram Janam Chauhan
Ram Janam Chauhanhttp://mhone.in
राम जनम चौहान वर्तमान में MH One News के साथ जुड़े हुए हैं। वे मुख्य रूप से पॉलिटिक्स और नेशनल न्यूज़ को कवर करते हैं। उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत दैनिक जागरण संस्थान के साथ की। इसके अलावा Zee Media और India News में इंटर्नशिप की है। राम जनम चौहान ने डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज (गोकलपुरी, दिल्ली) से पत्रकारिता एवं जनसंचार (BJMC) की डिग्री प्राप्त की है।
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