SIR को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के उत्तर प्रदेश दौरे के कार्यक्रम में बदलाव किया गया है। उन्हें 25 सितंबर को मेरठ की चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी (CCSU) में Gen-Z के साथ संवाद करना था। इसके बाद 28 सितंबर को वाराणसी में भी युवाओं के साथ कार्यक्रम प्रस्तावित था। दोनों कार्यक्रम अब स्थगित कर दिए गए हैं। इस बदलाव को लेकर चुनाव आयोग ने स्पष्टीकरण जारी किया है। आयोग के मुताबिक, कार्यक्रमों की तारीख बदलना प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है और इसके पीछे कई तरह के कारण हो सकते हैं।
21 सितंबर को लिया गया था फैसला
चुनाव आयोग ने बताया कि कार्यक्रमों की तारीखों में बदलाव स्थल की उपलब्धता, वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यक्रम और प्राकृतिक परिस्थितियों समेत अलग-अलग कारणों से किया जाता है। आयोग ने कहा कि पहले भी Electoral Literacy Club (ELC) से जुड़े सम्मेलनों की तारीखें बदली या कार्यक्रम स्थगित किए जाते रहे हैं। आयोग ने हिमाचल प्रदेश, लद्दाख और उत्तराखंड का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे बदलाव पहले भी हुए हैं। आयोग के मुताबिक, ज्ञानेश कुमार के मेरठ और वाराणसी वाले इन दोनों विशेष सम्मेलनों को स्थगित करने का फैसला 21 सितंबर को ही लिया गया था।
विपक्ष ने SIR को लेकर किया प्रदर्शन का ऐलान
CEC के यूपी दौरे में बदलाव ऐसे समय हुआ है जब विपक्षी दल SIR को लेकर चुनाव आयोग पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। दिल्ली में चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन प्रस्तावित है। बिहार में RJD कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन की बात कही गई है, जबकि लेफ्ट पार्टियां दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध जताने की तैयारी में हैं। विपक्षी दल SIR की प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।
रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ था विवाद
मौजूदा विवाद की पृष्ठभूमि में एक मीडिया रिपोर्ट भी है। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR के तहत मतदाता सूची से नाम हटाए जाने से जुड़े कुछ मुद्दों पर चिंता जताई थी और पिछले कुछ महीनों में 14 बार निर्णय लेने की प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज की थी। चुनाव आयोग ने इस दावे पर कहा कि किसी भी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय या टिप्पणियां सामने आना सामान्य बात है। आयोग का कहना है कि पिछले एक साल में जारी किए गए उसके सभी आदेश आयोग के सर्वसम्मत निर्णयों का परिणाम हैं।
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