इंडियन नेवी की द्विवार्षिक कमांडर्स कॉन्फ्रेंस 29 सितंबर से शुरू होकर 1 अक्टूबर तक चलेगी। यह नौसेना के शीर्ष स्तर का महत्वपूर्ण मंच है, जिसमें वरिष्ठ नेतृत्व के साथ ऑपरेशनल और एरिया कमांडर हिस्सा लेंगे। तीन दिवसीय बैठक में सैन्य-रणनीतिक स्तर पर नौसेना की तैयारियों, संसाधनों और भविष्य की प्राथमिकताओं की समीक्षा की जाएगी। सम्मेलन के दौरान समुद्री हितों की सुरक्षा में भारतीय नौसेना की भूमिका पर चर्चा होगी। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच समुद्री मार्गों और आपूर्ति से जुड़ी ‘ऊर्जा सुरक्षा’ भी प्रमुख मुद्दों में शामिल रहेगी।
पहले दिन राजनाथ सिंह साझा करेंगे विजन
सम्मेलन के पहले दिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह राष्ट्रीय समुद्री परिप्रेक्ष्य और नौसेना से जुड़ी अपेक्षाओं को लेकर अपना विजन कमांडरों के सामने रखेंगे। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और सेना प्रमुख भी नौसेना के कमांडरों के साथ संवाद करेंगे। इस बातचीत का उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच संयुक्तता और बेहतर तालमेल को मजबूत करना है। सम्मेलन में बदलते सुरक्षा माहौल के बीच समुद्री क्षेत्र में नौसेना की भूमिका और ऑपरेशनल तैयारियों पर भी विचार होगा।
AI, साइबर और ऑटोनॉमस सिस्टम पर चर्चा
कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में नौसेना प्रमुख और कमांडर-इन-चीफ ऑपरेशंस, लॉजिस्टिक्स, मैटेरियल, मानव संसाधन और प्रशिक्षण से जुड़े विषयों की समीक्षा करेंगे। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बिग डेटा एनालिसिस, ऑटोनॉमस सिस्टम और साइबर ऑपरेशंस जैसी तकनीकों को सैन्य क्षमता में शामिल करने पर चर्चा होगी। आधुनिक युद्ध की बदलती जरूरतों के मुताबिक नई तकनीकों को तेजी से अपनाने और उनके प्रभावी सैन्य इस्तेमाल पर भी फोकस रहेगा।
Innovation पर भी होगा जोर
नौसेना प्रवक्ता कैप्टन विवेक मधवाल के मुताबिक, सम्मेलन में उपलब्ध सैन्य संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और युद्धक क्षमता बढ़ाने के तरीकों का आकलन किया जाएगा। यह समीक्षा JAI यानी Jointness, आत्मनिर्भरता और Innovation के तीन प्रमुख स्तंभों के अनुरूप होगी। नौसेना की ओर से चलाए जा रहे ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों के संदर्भ में भी तैयारियों की समीक्षा की जाएगी। सम्मेलन का व्यापक उद्देश्य नौसेना की क्षमताओं को केंद्र सरकार के आत्मनिर्भरता और विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप आगे बढ़ाना है।
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