नेपाल और तिब्बत में अचानक आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद हालात लगातार चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। राहत और बचाव अभियान दूसरे सप्ताह में पहुंच चुका है, लेकिन अब एजेंसियों के सामने नई मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 960 से अधिक लोगों की मौत की खबर है, जबकि 4,400 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। भारत में भी बाढ़ के पानी के साथ बहकर आई कम से कम 17 लाशें बरामद की गई हैं।
बताया जा रहा है कि आपदा की शुरुआत चीन-नेपाल सीमा के पास ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटने के बाद हुई। अचानक बड़ी मात्रा में पानी चट्टानों और मलबे के साथ नीचे की ओर बहा, जिसकी चपेट में कई गांव और कस्बे आ गए। कई इलाके तबाह हो गए और बड़ी संख्या में लोग मलबे में दब गए।
शव सड़ने से बढ़ा महामारी का खतरा
आपदा के करीब एक सप्ताह बाद नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों में अब संक्रमण और महामारी फैलने का खतरा बढ़ गया है। मलबे और दलदल में दबे शवों के सड़ने से कई जगहों पर दुर्गंध फैलने लगी है। खराब सैनिटेशन व्यवस्था ने राहत एजेंसियों के सामने एक और बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। ऐसे में बचाव अभियान के साथ प्रभावित इलाकों में सफाई, शवों के सुरक्षित निस्तारण और संभावित महामारी को रोकने पर भी जोर दिया जा रहा है।
सुरंगों में फंसे मजदूरों को बचाने की कोशिश
नेपाल के रसुवा जिले में करीब 100 जलविद्युत परियोजना कर्मियों के सुरंगों के अंदर फंसे होने की आशंका है। बचाव दल भारी मलबे और गाढ़ी मिट्टी को हटाकर सुरंगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। अब तक दो सुरंगों से तीन शव बरामद किए जा चुके हैं। एक भारतीय सेना अधिकारी के मुताबिक, बचाव टीमें लगातार मोटी कीचड़ और मलबे को हटाकर आगे बढ़ रही हैं। हालात बेहद मुश्किल होने के बावजूद बचाव दल को अब भी कुछ लोगों के जिंदा मिलने की उम्मीद है। नेपाल सरकार ने राहत और बचाव अभियान में करीब 20,600 सुरक्षाकर्मियों और कर्मचारियों को लगाया है। अब तक 3,100 से ज्यादा लोगों को प्रभावित इलाकों से सुरक्षित निकाले जाने की जानकारी है।
आपदा के बाद शवगृहों में भी जगह कम पड़ने लगी है। अज्ञात शवों के डीएनए सैंपल लिए जा रहे हैं और इसके बाद उन्हें दफनाया जा रहा है, ताकि भविष्य में पहचान होने पर शव परिजनों को सौंपे जा सकें। कई परिवार सामुदायिक केंद्रों में पहुंचकर बरामद शवों की तस्वीरें देख रहे हैं और लापता रिश्तेदारों की तलाश कर रहे हैं। नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील करते हुए शवों को सुरक्षित रखने के लिए 1,000 से ज्यादा फ्रीजर यूनिट की जरूरत बताई है। लापता लोगों में 592 विदेशी नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं।
तिब्बत में भी भारी नुकसान
चीन के मुताबिक, तिब्बत में इस आपदा में 16 लोगों की मौत हुई है, जबकि 546 लोग लापता बताए गए हैं। 2,000 से ज्यादा बचावकर्मी राहत अभियान में जुटे हैं, लेकिन सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों तक पहुंचना अब भी बेहद मुश्किल बना हुआ है। कुछ तिब्बती संगठनों ने चीन की ओर से जारी आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए अधिक जानकारी की मांग की है। हालांकि, चीन ने मौतों के आंकड़े छिपाने के आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि आपदा से जुड़ी जानकारी पारदर्शी तरीके से समय पर जारी की जा रही है।
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