हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अबू धाबी(India and UAE) के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद अल नाहयान के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का माहौल बना हुआ है। क्राउन प्रिंस खालिद अपने पिता और यूएई के राष्ट्रपति के जर्मनी दौरे पर होने के कारण इस सम्मेलन में अपने देश का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। बैठक के तुरंत बाद वह शनिवार को ही अपने वतन लौट गए।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया के जरिए इस मुलाकात की जानकारी देते हुए बताया कि दोनों नेताओं ने रक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), अंतरिक्ष, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और कनेक्टिविटी जैसे अहम क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की है। इसके अलावा, भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) और ऊर्जा के बुनियादी ढांचे में निवेश को लेकर भी सकारात्मक बातचीत हुई। पीएम मोदी ने मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता के दौर में भारत और यूएई के संबंधों को शांति और स्थिरता का एक मजबूत प्रतीक बताया है।
विदेश मंत्रालय का बयान
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक, दोनों नेताओं ने यूएई के नए सॉवरेन निवेश फंड ‘L’Imad’ की सराहना की। इसके साथ ही, यूएई की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी (IHC) द्वारा ओडिशा में एक इंटीग्रेटेड ग्रीनफील्ड एल्युमीनियम प्रोजेक्ट के तहत 11.5 अरब डॉलर के भारी-भरकम निवेश पर भी चर्चा हुई। इस प्रोजेक्ट के लिए IHC की कंपनी ‘इंटरनेशनल रिसोर्सेज होल्डिंग’ और ‘अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (AEL) के बीच 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी का समझौता हुआ है जिससे ओडिशा के वैश्विक एल्युमीनियम हब बनने की उम्मीद है।
बैठक में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा की निरंतर आपूर्ति बनाए रखने और यूएई में रहने वाले 40 लाख से अधिक भारतीयों की सुरक्षा व भलाई पर भी विशेष चर्चा की गई। भारत ने ब्रिक्स सम्मेलन में यूएई की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए आने वाले समय में आपसी रिश्तों को और अधिक ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लिया है।