बच्चों के अपहरण और मानव तस्करी से जुड़े मामलों में व्यवस्था को मजबूत करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की है। अदालत ने केंद्र सरकार के साथ सभी संबंधित राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह याचिका वकील अश्विनी उपाध्याय की ओर से दाखिल की गई है। इसमें बच्चों के लापता होने, अपहरण और तस्करी के मामलों में तेजी से FIR, जांच और सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की मांग की गई है।
अवैध गोद लेने से लेकर बाल मजदूरी तक के नेटवर्क का दावा
PIL में कहा गया है कि बच्चों के अपहरण के पीछे अलग-अलग तरह के संगठित नेटवर्क सक्रिय हो सकते हैं। याचिका में अवैध गोद लेने वाले रैकेट, अंतरराज्यीय चाइल्ड ट्रैफिकिंग नेटवर्क और बच्चों के शोषण से जुड़े गिरोहों का जिक्र किया गया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि कुछ मामलों में बच्चों को अंगों की ट्रेडिंग और गैर-कानूनी मेडिकल ट्रायल जैसे कामों के लिए भी निशाना बनाया जाता है। याचिका में बच्चों को भीख मंगवाने, बाल मजदूरी, प्रॉस्टिट्यूशन और अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों में इस्तेमाल किए जाने की बात भी कही गई है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, ऐसे मामलों में कार्रवाई में देरी होने से संगठित गिरोहों को अपना नेटवर्क चलाने का मौका मिलता है।
विशेष व्यवस्था की मांग
याचिका में आरोप लगाया गया है कि लापता या अगवा बच्चों से जुड़े मामलों में कई बार FIR दर्ज करने और जांच शुरू करने में देरी होती है। इसके बाद लंबी जांच और ट्रायल की प्रक्रिया भी चुनौती बनती है। इसी को देखते हुए PIL में मांग की गई है कि बच्चों के अपहरण के मामलों की जांच ACP या SHO स्तर के अधिकारी से कराई जाए।
बिहार से लेकर राजस्थान तक आंकड़ों का हवाला
PIL में 1 जून 2026 तक के आंकड़ों का हवाला देते हुए बिहार में बच्चों के लापता होने की स्थिति का उल्लेख किया गया है। याचिका के अनुसार, बिहार में 2013 से हर साल करीब 15 हजार मिसिंग केस दर्ज होते हैं और इनमें बड़ी संख्या बच्चों की होती है। इसमें दावा किया गया है कि लगभग 50 फीसदी बच्चे ही बरामद हो पाते हैं। याचिका में NCRB के आंकड़ों का हवाला देकर ओडिशा, बिहार, तेलंगाना और महाराष्ट्र में मानव तस्करी के मामलों को लेकर चिंता जताई गई है। नाबालिग लड़कों की तस्करी के मामलों में ओडिशा के बाद बिहार का जिक्र है, जबकि नाबालिग लड़कियों की तस्करी के मामलों में राजस्थान को सबसे आगे बताया गया है।
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