शिमला जिला परिषद में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पदों का इंतजार गुरुवार को खत्म हो सकता है। 102 दिन बाद बचत भवन में सुबह 10:30 बजे चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई। डीसी शिमला की अध्यक्षता में बैठक और चुनाव कराया जाएगा। 25 सदस्यीय परिषद में बहुमत के लिए 13 सदस्यों का समर्थन जरूरी है, लेकिन अभी किसी भी दल के पास यह आंकड़ा अपने दम पर नहीं है।
25 सदस्यों में बहुमत का आंकड़ा 13
मौजूदा गणित में भाजपा समर्थित 11 और कांग्रेस समर्थित 10 सदस्य बताए जा रहे हैं, जबकि दो सदस्य निर्दलीय हैं। यही दोनों सदस्य अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में निर्णायक साबित हो सकते हैं। कांग्रेस और भाजपा दोनों निर्दलीयों के समर्थन को लेकर अपने-अपने दावे कर रहे हैं। ऐसे में अंतिम तस्वीर मतदान के दौरान ही स्पष्ट होगी। कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए सुरेंद्र रेटका के नाम पर दांव लगा सकती है, जबकि उपाध्यक्ष पद के लिए निर्दलीय को उम्मीदवार बनाने की चर्चा है। भाजपा ने अभी अपने प्रत्याशी के नाम का ऐलान नहीं किया है और पार्टी आखिरी समय में नाम सामने ला सकती है। जिस पक्ष को 13 या उससे अधिक सदस्यों का समर्थन मिलता है, उसके लिए दोनों पदों पर बढ़त बनाना आसान होगा।
क्रॉस वोटिंग से बचने के निर्देश
चुनाव से एक दिन पहले भाजपा ने शिमला में जिला परिषद सदस्यों के साथ बैठक की और आगे की रणनीति पर चर्चा की। पार्टी ने सदस्यों को साथ रहने तथा क्रॉस वोटिंग से बचने के निर्देश दिए। दूसरी ओर कांग्रेस समर्थित सदस्य मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के दिल्ली से लौटने के बाद ओक ओवर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने भी उन्हें एकजुट रहने को कहा।जिला प्रशासन की ओर से सभी सदस्यों को चुनाव संबंधी सूचना पहले ही दी जा चुकी थी। बुधवार शाम तक बचत भवन में बैठक और चुनाव की तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। नियमों के मुताबिक कुल सदस्यों के 50 प्रतिशत यानी कम से कम 13 सदस्यों की मौजूदगी में कोरम पूरा होगा, जिसके बाद चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
दो बार टल चुका चुनाव
हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव 31 मई को हुए थे। शिमला जिला परिषद के सदस्यों का निर्वाचन हो गया था, लेकिन अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव नहीं हो सका। चुनाव में देरी का मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा और अदालत के आदेश के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ी। इससे पहले अगस्त के पहले सप्ताह में भी चुनाव के लिए बैठक बुलाई गई थी, लेकिन कांग्रेस और भाजपा दोनों खेमों के सदस्यों के बैठक में शामिल न होने से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। अब गुरुवार को तीसरी बैठक में चुनाव कराया जाएगा। शिमला जिला परिषद पर लंबे समय से कांग्रेस का प्रभाव रहा है, जबकि भाजपा इस बार सत्ता समीकरण बदलने की कोशिश में है। ऐसे में दो निर्दलीय सदस्यों का फैसला अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव की दिशा तय कर सकता है।
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