Bareilly Violence: उत्तर प्रदेश के जाने-माने बरेली हिंसा मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपी और इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के अध्यक्ष मौलाना तौकीर रजा खान को बड़ा झटका दिया है। जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की सिंगल बेंच ने उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने मामले में राहत देने से इनकार करते हुए हिंसक और भड़काऊ नारों और कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले कृत्यों पर सख्त रुख अपनाया है।
नारे को लेकर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने ‘गुस्ताख-ए-नबी की एक ही सजा, सर तन से जुदा’ जैसे नारे को देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता के लिए खुली चुनौती बताया। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के नारे कानून के शासन को सीधी चुनौती देने के समान हैं। अदालत ने इसे ‘नारा-ए-तकबीर, अल्लाहु अकबर’, ‘जय श्री राम’ या ‘सत श्री अकाल’ जैसे पारंपरिक धार्मिक नारों से अलग बताया और इसे सशस्त्र विद्रोह (Armed Rebellion) के लिए सीधा उकसावा बताया है।
पुलिस पर हमले को भी गंभीर माना
हाईकोर्ट ने यह भी साफ किया कि कानून-व्यवस्था संभालने में जुटी पुलिस पर हमला करना और अराजक स्थिति पैदा करना स्वीकार नहीं किया जा सकता। अदालत की टिप्पणियां बरेली हिंसा के दौरान सामने आए पथराव, पेट्रोल बम और फायरिंग जैसे आरोपों की गंभीरता के संदर्भ में सामने आईं हैं।
बचाव पक्ष ने बताया राजनीतिक रंजिश
मौलाना तौकीर रजा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश त्रिवेदी और इमरानुल्लाह ने पैरवी की। बचाव पक्ष ने दावा किया कि मौलाना को राजनीतिक रंजिश के कारण मामले में फंसाया गया है। वकीलों के मुताबिक, 19 सितंबर की बैठक में केवल विरोध प्रदर्शन की अपील की गई थी, लेकिन प्रशासन से अनुमति नहीं मिलने के बाद कार्यक्रम रद्द कर दिया गया था।
हिंसा के दिन मौजूद नहीं होने का दावा
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि 26 सितंबर को हिंसा के समय मौलाना मौके पर मौजूद नहीं थे। उनका दावा था कि वह सुबह 10 बजे से अपने घर में नजरबंद थे और उन्होंने न तो हिंसा भड़काई और न ही कोई भाषण दिया।
सरकार ने बताया मास्टरमाइंड
वहीं, राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी और एजीए परितोष मालवीय ने जमानत का जोरदार विरोध किया। अभियोजन ने मौलाना को हिंसा का मुख्य मास्टरमाइंड बताया। सरकार के मुताबिक, 19 सितंबर को नमाज के बाद इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान में भीड़ जुटने की अपील की गई थी।
भीड़ पर गंभीर आरोप
अभियोजन के अनुसार, धारा 163 लागू होने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग जमा हुए। आरोप है कि भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया, पेट्रोल बम फेंके, फायरिंग की और सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाया। जांच में मौलाना के खिलाफ कुल 24 आपराधिक मामले सामने आने की बात कही गई है। उसके खिलाफ 21 दिसंबर 2025 को चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है।
घटना के बाद के आचरण पर भी सवाल
हाईकोर्ट ने घटना के बाद मौलाना के आचरण को भी गंभीरता से लिया। अभियोजन के मुताबिक, हिंसा के बाद उन्होंने सह-आरोपी फरहत अली के घर से एक वीडियो जारी किया और भीड़ को जुटने के लिए धन्यवाद दिया। उनकी गिरफ्तारी भी फरहत अली के घर से हुई, जो उनके अपने घर से करीब आठ किलोमीटर दूर बताया गया है।
अब जमानत से राहत नहीं
इन सभी परिस्थितियों और मामले में सामने रखे गए आरोपों को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मौलाना तौकीर रजा की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत के इस फैसले से बरेली हिंसा मामले में उनके खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई को बड़ा झटका लगा है।
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