उत्तर प्रदेश में साल 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इसी बीच बहुजन समाज पार्टी (BSP) में हुए एक बड़े संगठनात्मक बदलाव ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। आइए, इस पूरी घटना को आसान शब्दों में समझते हैं।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने एक बार फिर अपने भतीजे आकाश आनंद(Akash Anand) से राष्ट्रीय संयोजक जैसी बड़ी जिम्मेदारी वापस ले ली है। पार्टी संस्थापक कांशीराम के सिद्धांतों का हवाला देते हुए मायावती ने कहा है कि परिवार के सदस्यों को संगठन के बड़े पदों से दूर रखना चाहिए और आकाश को अभी राजनीति में थोड़ा और परिपक्व (mature) होने की जरूरत है। हालांकि, वह पार्टी में रहकर काम करना जारी रखेंगे।
संजय निषाद का बड़ा सियासी ऑफर
मायावती के इस कदम के तुरंत बाद यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के प्रमुख डॉ. संजय निषाद ने आकाश आनंद को अपनी पार्टी में शामिल होने का खुला ऑफर दे दिया है। एनडीए की सहयोगी निषाद पार्टी के प्रमुख ने कहा कि ‘जिधर जवानी चलती है उधर जमाना चलता है।’
उन्होंने आकाश को न सिर्फ पार्टी ज्वाइन करने बल्कि अपनी इच्छानुसार कोई भी बड़ी जिम्मेदारी और पद संभालने का न्योता दिया है। संजय निषाद का मानना है कि आकाश जैसे युवा नेताओं को आगे बढ़ने और युवाओं को जोड़ने का पूरा मौका मिलना चाहिए।
यूपी की राजनीति में नए समीकरण की सुगबुगाहट
इस घटनाक्रम के बाद उत्तर प्रदेश के राजनीतिक दायरे में नए समीकरणों पर कयास लगाए जाने लगे हैं। एक तरफ मायावती पार्टी को अपने पुराने वैचारिक और अनुशासित रास्ते पर आगे बढ़ा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल इस स्थिति का अपने सियासी नफे-नुकसान के हिसाब से आकलन कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि आकाश आनंद इस राजनीतिक प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाते हैं।
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