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लखनऊ मेट्रो का बढ़ेगा दायरा, 10 नए कॉरिडोर हुए प्रस्तावित, शहर की कनेक्टिविटी को मिलेगी रफ्तार…

लखनऊ में आने वाले वर्षों में मेट्रो नेटवर्क को बड़े स्तर पर विस्तार देने की तैयारी चल रही है। लक्ष्य अगले करीब दो दशकों में राजधानी के प्रमुख इलाकों को मेट्रो सेवा से जोड़ना है। प्रस्तावित योजना में लखनऊ के साथ बाराबंकी को भी मेट्रो नेटवर्क(Lucknow Metro) से जोड़ने का खाका तैयार किया जा रहा है। इससे शहर और आसपास के क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। नए मेट्रो कॉरिडोर के संचालन के लिए डिपो बेहद जरूरी होगा। इसके लिए लगभग 20 हेक्टेयर जमीन तलाशने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने उपयुक्त जमीन की पहचान के लिए पांच अधिकारियों की समिति बनाई है। समिति ऐसी जगह तलाश रही है, जिसे प्रस्तावित मेट्रो लाइन से आसानी से जोड़ा जा सके। इसी वजह से कॉरिडोर के संभावित रूट से करीब एक से दो किलोमीटर के दायरे में जमीन देखी जा रही है। शुरुआती तौर पर तीन संभावित स्थानों पर जमीन की पड़ताल की जा रही है। समिति सरकारी और अन्य उपलब्ध जमीनों की जानकारी जुटाने के साथ उनके स्वामित्व, उपयोगिता और रिकॉर्ड की भी जांच करेगी।

पांच सदस्यीय समिति करेगी चयन

LDA उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार की ओर से गठित समिति में अपर सचिव, वित्त नियंत्रक, मुख्य नगर नियोजक और मुख्य अभियंता को सदस्य बनाया गया है। अधिशासी अभियंता मनोज सागर को समिति का संयोजक बनाया गया है। समिति का मुख्य उद्देश्य ऐसी जमीन चुनना है, जहां भविष्य में डिपो बनाया जा सके और उसे मेट्रो कॉरिडोर से जोड़ने में तकनीकी परेशानी न हो।

बाराबंकी से पीजीआई तक विस्तार

प्रस्तावित नेटवर्क में बाराबंकी, पीजीआई, सीतापुर रोड, आईआईएम रोड, राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल, एकाना स्टेडियम, सुशांत गोल्फ सिटी और आशियाना जैसे क्षेत्रों को जोड़ने की योजना है। दीर्घकालिक लक्ष्य 2047 तक लखनऊ के प्रमुख हिस्सों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ना है। इससे यातायात का दबाव घटाने और शहर में आवागमन आसान बनाने में मदद मिल सकती है।

डिपो में होंगे कई जरूरी काम

मेट्रो डिपो में केवल ट्रेनें खड़ी नहीं की जाएंगी। यहां ट्रेनों की सफाई, नियमित जांच, रखरखाव और मरम्मत जैसे जरूरी काम होंगे। इसलिए डिपो के लिए ऐसी जमीन का चुनाव जरूरी है जो मेट्रो लाइन के करीब होने के साथ परिचालन की के हिसाब से भी सुविधाजनक हो।

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