Leipzig Airpor Attack: रूस-यूक्रेन युद्ध का असर यूरोप में और गहराता दिख रहा है। जर्मनी सरकार ने मंगलवार को दावा किया कि लीपजिग/हॉल हवाई अड्डे पर बीते महीने हुए हमले की साजिश के पीछे रूस का हाथ था। जर्मन अधिकारियों के इस खुलासे ने NATO क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
ड्रोन में मिले विस्फोटक और डेटोनेटर
जर्मनी के गृह मंत्री अलेक्जेंडर डोब्रिंट के मुताबिक, जांच के दौरान ड्रोन की बनावट, उसके अलग-अलग हिस्सों, विस्फोटक और डेटोनेटर जैसी चीजें बरामद हुईं। उनका कहना है कि इनमें से कुछ सामान पहले सामने आए रूसी हाइब्रिड ऑपरेशंस से मेल खाता हुआ दिखाई देता है। इन ऑपरेशंस का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध से जुड़े मामलों में किए जाने की बात सामने आई है।
4 अगस्त को टला था बड़ा हादसा
जर्मन अधिकारियों के अनुसार, 4 अगस्त की शाम एक यूक्रेनी विमान के पास विस्फोटकों से लदा ड्रोन मिला था। सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते ड्रोन में मौजूद विस्फोटक को डिफ्यूज कर दिया। इस कार्रवाई से संभावित बड़े हादसे को टाल दिया गया।
NATO पर क्यों बढ़ सकता है दबाव?
NATO के नियमों के मुताबिक, किसी सदस्य देश पर हमला होने की स्थिति में बाकी सदस्य देशों पर भी कार्रवाई और सहायता की जिम्मेदारी बन सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह जरूरी नहीं है कि NATO सीधे सैन्य हमला ही करे। NATO यह भी मानता है कि गंभीर साइबर हमले और कुछ हाइब्रिड हमले आर्टिकल 5 के दायरे में आ सकते हैं।
अब डोनाल्ड ट्रंप पर टिकी नजर
NATO में अमेरिका की भूमिका सबसे अहम है। अमेरिका ने ही जी 20 में रूस की फिर से एंट्री करवाई है। ऐसे में जर्मनी के इस दावे के बाद यह देखना अहम होगा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप क्या प्रतिक्रिया देते हैं। साथ ही जर्मनी की आगे की कार्रवाई पर भी दुनिया की नजर रहेगी।
रूस के लिए बड़ी चुनौती की ओर इशारा
गृह मंत्री अलेक्जेंडर डोब्रिंट ने कहा कि पूरी साजिश में तकनीकी विशेषज्ञता और काफी तैयारी दिखाई देती है। हालांकि, जर्मन अधिकारियों का मानना है कि इसे अंजाम देने के लिए निचले स्तर के एजेंटों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। डोब्रिंट के अनुसार, खुफिया जानकारी और पुलिस जांच को एक साथ देखने पर यह साबित होता है कि लीपजिग एयरपोर्ट पर हमले की कोशिश के लिए रूस जिम्मेदार था।
जर्मनी ने रूस के खिलाफ लिया बड़ा एक्शन
जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने रूस पर जानबूझकर जर्मनी के साथ पहले से तनावपूर्ण संबंधों को और खराब करने का आरोप लगाया। इसके बाद बर्लिन ने रूस के खिलाफ ठोस कदम उठाने का ऐलान किया है। बॉन स्थित रूसी कॉन्सुलेट को 18 सितंबर से बंद कर दिया जाएगा।
रशियन हाउस का अनुबंध भी होगा खत्म
जर्मनी ने बर्लिन स्थित रशियन हाउस सांस्कृतिक केंद्र को चलाने वाले अनुबंध को भी खत्म करने का फैसला किया है। ऐसे में लीपजिग एयरपोर्ट की घटना के बाद जर्मनी और रूस के बीच तनाव और बढ़ने के संकेत हैं। अब बड़ा सवाल यही है कि इस पूरे घटनाक्रम पर अमेरिका और खासकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं।
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