भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ऑनलाइन साइबर धोखाधड़ी और संदिग्ध खातों से जुड़े मामलों को निपटाने के लिए एक लक्षित प्रणाली का ड्राफ्ट जारी किया है। इस नए ढांचे के तहत बैंक अब किसी एक संदिग्ध लेन-देन के कारण ग्राहक का पूरा खाता ब्लॉक नहीं करेंगे, बल्कि केवल विवादित राशि पर ही अस्थायी रोक लगाएंगे। केंद्रीय बैंक ने अपने ‘नो योर कस्टमर (KYC) निर्देश, 2025’ में प्रस्तावित बदलावों पर आम जनता से सुझाव मांगे हैं। यह नया नियम 1 अप्रैल, 2027 से लागू होना प्रस्तावित है, हालांकि बैंक इसे समय से पहले भी अपना सकते हैं।
1,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन की निगरानी
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत बैंकों को 1,000 रुपये या उससे अधिक के असामान्य या संदिग्ध ट्रांजैक्शन को पकड़ने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी तंत्र तैनात करना अनिवार्य होगा। यह तकनीक ऐसे लेनदेन को तुरंत चिन्हित करेगी जो अचानक किए गए हों, ग्राहक के घोषित आय प्रोफाइल से मेल न खाते हों या फिर जिनका संबंध किसी ज्ञात साइबर-फॉड नेटवर्क से हो। इस पहल का मुख्य उद्देश्य निर्दोष ग्राहकों को उस परेशानी से बचाना है जो एक विवादित लेनदेन के चक्कर में पूरे खाते के फ्रीज होने पर होती है।
साक्ष्य पेश करने के लिए मिलेगा 20 दिनों का समय
यदि किसी राशि पर अस्थायी रोक लगाई जाती है, तो खाताधारक को लेनदेन को वैध साबित करने के लिए 20 कैलेंडर दिनों का समय दिया जाएगा। ग्राहक इस अवधि में पहचान प्रमाण पत्र, फंड के स्रोत का दस्तावेज और ट्रांसफर के उद्देश्य से जुड़ी जानकारी जमा कर सकता है। बैंकों को ग्राहक के जवाब और दस्तावेजों की समीक्षा 10 कैलेंडर दिनों के भीतर करनी होगी। यदि ग्राहक का स्पष्टीकरण संतोषजनक पाया जाता है, तो बैंक को तुरंत वह होल्ड हटाना होगा और शेष अनिर्णीत राशि ग्राहक की पहुंच में बनी रहेगी।
30 दिनों के भीतर पुलिस को लेनी होगी वैधानिक कार्रवाई
अगर ग्राहक 20 दिनों के भीतर कोई जवाब नहीं देता है या प्रस्तुत साक्ष्य बैंक को आश्वस्त करने में विफल रहते हैं, तो बैंक मामले को एनसीआरपी (NCRP) या सीएफसीएफआरएमएस (CFCFRMS) पोर्टल के माध्यम से संबंधित क्षेत्राधिकार वाली पुलिस को प्रेषित करेंगे। इसके बाद कानून प्रवर्तन एजेंसियों के पास रेफरल की तारीख से 30 दिनों का समय होगा ताकि वे कोई वैधानिक रोक (स्टैट्यूटरी रेस्टोरेंट ऑर्डर) जारी कर सकें। बिना किसी आधिकारिक पुलिस आदेश के बैंक अनिश्चित काल तक विवादित रकम पर रोक लगाकर नहीं रख सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक आदेश के बाद लिया गया निर्णय
RBI का यह नया ढांचा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 4 अगस्त, 2026 को दिए गए उस निर्देश के बाद आया है, जिसमें कोर्ट ने केंद्रीय बैंक को संदिग्ध म्यूल गतिविधियों और साइबर-सक्षम धोखाधड़ी में शामिल मामलों के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने को कहा था। इस कदम से साइबर क्राइम जांच में पारदर्शिता आएगी और आम नागरिकों के निर्बाध बैंकिंग अधिकारों की सुरक्षा हो सकेगी।
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