गलवान घाटी विवाद के बाद भारत और चीन के बीच उपजे कड़वाहट भरे संबंधों में अब बड़ा सुधार देखने को मिल रहा है। दोनों देशों ने यह स्वीकार किया है कि सीमा विवाद अपनी जगह है, लेकिन व्यापारिक और आर्थिक सहयोग को रोकना दोनों के हित में नहीं है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई सकारात्मक बातचीत के बाद दोनों पक्ष आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को संतुलित करने पर राजी हुए हैं। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और चीन के वाणिज्य मंत्री वांग वेन्ताओ के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें दोनों देशों के नेताओं की सहमति को लागू करने तथा व्यापार की राह में आने वाली बाधाओं को दूर करने पर जोर दिया गया।
China's Minister of Commerce Wang Wentao met with Indian Minister of Commerce and Industry Piyush Goyal in Delhi.
India is an important neighbor of China. China stands ready to work with India to implement the important consensus reached by the leaders of the two countries,… pic.twitter.com/2oLJweWLoD
— Yu Jing (@ChinaSpox_India) September 14, 2026
99 अरब डॉलर से अधिक के व्यापार घाटे को कम करने की चुनौती
वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, भारत और चीन के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार लगभग 127.7 अरब डॉलर रहा है। इस दौरान भारत का चीन को निर्यात बढ़कर लगभग 19.47 अरब डॉलर तक पहुंचा, जबकि चीन से आयात का आंकड़ा भारी उछाल के साथ 131.62 अरब डॉलर दर्ज किया गया। इस विशाल अंतर के कारण भारत को लगभग 99.19 अरब डॉलर का भारी-भरकम व्यापार घाटा उठाना पड़ रहा है। भारत की प्राथमिक रणनीति केवल चीनी सामानों के आयात तक सीमित रहने के बजाय अपने निर्यात को बढ़ाना और चीनी बाजार में भारतीय कंपनियों की सीधी पहुंच सुनिश्चित कराना है।
भारतीय फार्मा और कृषि क्षेत्र के लिए खुल सकते हैं नए द्वार
चीन के रुख में आए इस रणनीतिक बदलाव से भारतीय फार्मास्यूटिकल और कृषि क्षेत्रों को सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है। भारत जेनेरिक और सस्ती दवाओं का बड़ा उत्पादक है, लेकिन चीन के कड़े नियमों और जटिल मंजूरियों के कारण भारतीय फिनिश्ड मेडिसिन और फॉर्मुलेशन वहां आसानी से नहीं पहुंच पाते थे। इसके अलावा, यदि चीन आयात नियमों, टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया को आसान बनाता है, तो भारत से चावल, मसाले, सी-फूड, प्रोसेस्ड फूड, चाय जैसे कृषि उत्पादों का निर्यात कई गुना बढ़ सकता है।
संतुलित व्यापार और घरेलू उद्योगों के हितों की सुरक्षा आवश्यक
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स घटकों, सोलर उपकरणों, मशीनरी और बैटरियों के लिए काफी हद तक चीनी आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भर है। चीन से सुचारू आपूर्ति बनाए रखने के साथ-साथ भारत को सतर्कता भी बरतनी होगी ताकि चीनी उत्पादों की अनियंत्रित आमद से घरेलू उद्योगों पर कोई विपरीत दबाव न पड़े। भारत का मुख्य ध्यान चीन से आवश्यक कच्चा माल और आधुनिक तकनीक प्राप्त करने के साथ अपने उत्पादों के लिए चीनी बाजार में बराबरी का अवसर हासिल करने पर केंद्रित है।
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