Sant Premanand Maharaj Ashram: दीक्षित साधक रसिक दुलारी शरण (दीपक लोधी) की मौत के आठ दिन बाद संत प्रेमानंद महाराज से जुड़े श्री हित राधा केलि कुंज आश्रम की ओर से पहला आधिकारिक बयान सामने आया है। 25 सितंबर को हुई इस घटना को लेकर लगातार उठ रहे सवालों और सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच आश्रम ने कहा कि पूज्य महाराज श्री और उनका पूरा परिकर इस घटना से बेहद दुखी और ‘आहत’ है। साथ ही, भक्तों और आम लोगों से अपुष्ट खबरों तथा अफवाहों पर भरोसा नहीं करने की अपील की गई है।
आश्रम ने जताई संवेदना
श्रीहित राधा केलि कुंज ट्रस्ट की ओर से जारी बयान में कहा गया कि 25 सितंबर की दुखद घटना से महाराज और आश्रम परिवार बेहद दुखी हैं। ट्रस्ट ने मृतक साधक के परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि मामले की निष्पक्ष और तथ्यात्मक जांच में पुलिस प्रशासन को पूरा सहयोग दिया जा रहा है।
जांच पूरी होने तक संयम की अपील
ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं और आमजन से अपील की कि पुलिस जांच पूरी होने तक किसी भी अपुष्ट सूचना, अफवाह या अनुमान के आधार पर महाराज और आश्रम की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला दुष्प्रचार न किया जाए। आश्रम की ओर से स्पष्ट किया गया कि मामले में तथ्य सामने आने का इंतजार किया जाना चाहिए।
2 अक्टूबर को भी जारी हुआ था पत्र
इससे पहले 2 अक्टूबर को ब्रज संत महिमा की ओर से भी एक पत्र जारी किया गया था। इसमें कुछ कंटेंट क्रिएटर्स और न्यूज एंकरों पर चंद पैसों और टीआरपी के लिए महाराज को बदनाम करने का आरोप लगाते हुए कड़ी चेतावनी दी गई थी। पत्र में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने को निंदनीय बताया गया था।
अनिरुद्ध आचार्य ने किया समर्थन
विवाद के बीच चर्चित कथावाचक अनिरुद्ध आचार्य भी संत प्रेमानंद महाराज के समर्थन में सामने आए। अपनी कथा के दौरान उन्होंने कहा कि कुछ लोग केवल व्यूज हासिल करने के लिए बिना पूरी बात समझे खुद ही जज बन जाते हैं और फैसला सुनाने लगते हैं। उन्होंने प्रेमानंद महाराज के प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि महाराज ने करोड़ों भटके हुए युवाओं को सही दिशा दिखाकर भक्ति मार्ग से जोड़ा है।
बाल संरक्षण आयोग में पहुंची शिकायत
दूसरी ओर, मथुरा में श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने उत्तर प्रदेश बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष को पत्र भेजकर आश्रम से जुड़ा एक अलग मुद्दा उठाया है। उन्होंने दावा किया कि कई नाबालिग बालक-बालिकाएं अध्यात्म के नाम पर घर छोड़कर आश्रम में रहने लगते हैं और बाद में उनके परिजन उन्हें तलाशते हुए आश्रम पहुंचते हैं।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
दिनेश फलाहारी ने ऐसे मामलों की उच्च स्तरीय जांच कराकर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि यदि भविष्य में आश्रम परिसर में किसी नाबालिग के साथ कोई अनहोनी होती है, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी। हालांकि, ये आरोप और चिंताएं शिकायतकर्ता की ओर से उठाई गई हैं और इनकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
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