Nepal: नेपाल सरकार ने महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए मासिक धर्म अवकाश का प्रावधान संघीय सिविल सेवा विधेयक में शामिल किया है। यह विधेयक 1 अक्टूबर 2026 को संघीय संसद में पंजीकृत किया गया। प्रस्तावित कानून में सिविल सेवा से जुड़े कई नियमों के साथ छुट्टियों की व्यवस्था में मासिक धर्म अवकाश को भी जगह दी गई है। हालांकि, विधेयक अभी कानून नहीं बना है।
महिलाओं को मिलेंगी कई तरह की छुट्टियां
विधेयक के तहत महिला कर्मचारियों को सामान्य कर्मचारियों की तरह आकस्मिक, गृह, बीमारी, अध्ययन और असाधारण अवकाश मिलता रहेगा। इसके अलावा मासिक धर्म अवकाश, मातृत्व अवकाश, प्रसव अवकाश और मातृत्व देखभाल अवकाश का भी प्रावधान प्रस्तावित है। मासिक धर्म अवकाश कितने दिनों का होगा और इसे लेने की सटीक शर्तें क्या होंगी, यह मौजूदा विधेयक में स्पष्ट नहीं है।
जापान और दक्षिण कोरिया में पहले से नियम
मासिक धर्म अवकाश की कानूनी व्यवस्था दुनिया के कुछ ही देशों में है। जापान में 1947 से ऐसा प्रावधान है, जबकि दक्षिण कोरिया में महिलाओं को महीने में एक दिन का मासिक धर्म अवकाश मिलता है। इंडोनेशिया, ताइवान, वियतनाम, जाम्बिया और स्पेन में भी अलग-अलग स्वरूप में ऐसी व्यवस्था लागू है। स्पेन ने 2023 में गंभीर मासिक धर्म संबंधी दर्द के मामलों के लिए कानूनी अवकाश की व्यवस्था शुरू की थी।
नेपाल में महिलाओं की बढ़ी भागीदारी
नेपाल में सरकारी सेवाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए 2007 में Civil Service Act, 1993 में संशोधन कर खुली प्रतियोगिता से भरी जाने वाली सीटों में 45 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की गई थी। इस आरक्षित हिस्से में 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए थीं। अब नए संघीय सिविल सेवा विधेयक में समावेशी आरक्षण के हिस्से को 45 से बढ़ाकर 49 प्रतिशत करने और उसके आधे हिस्से को महिलाओं के लिए रखने का प्रस्ताव है।
महिलाओं की संख्या में बड़ा बदलाव
नेपाल के सरकारी तंत्र में महिलाओं की भागीदारी पिछले वर्षों में लगातार बढ़ी है। इसी बढ़ती भागीदारी के बीच सरकार ने संघीय सिविल सेवा कानून में महिलाओं से जुड़ी छुट्टियों और सुविधाओं को विस्तार देने का प्रस्ताव रखा है। यह विधेयक संघीय ढांचे के अनुरूप नेपाल की सिविल सेवा व्यवस्था में व्यापक बदलाव का हिस्सा है।
भारत में अलग केंद्रीय प्रावधान नहीं
भारत में केंद्र सरकार की सिविल सेवाओं के लिए अलग से सार्वभौमिक मासिक धर्म अवकाश का केंद्रीय प्रावधान नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2024 में इस मुद्दे पर सरकार को नीति बनाने की संभावना पर विचार करने को कहा था, लेकिन अदालत ने पूरे देश में ऐसी छुट्टी अनिवार्य करने का आदेश नहीं दिया। बिहार में महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए महीने में दो दिन की पीरियड लीव का प्रावधान है, जबकि ओडिशा ने 2024 में महिला सरकारी कर्मचारियों के लिए एक दिन के मासिक धर्म अवकाश की घोषणा की थी।
नेपाल में अभी प्रस्ताव, कानून नहीं
इसलिए फिलहाल नेपाल की महिला सरकारी कर्मचारियों को यह सुविधा कानून के तौर पर उपलब्ध नहीं हुई है। संघीय सिविल सेवा विधेयक के संसद में पारित होकर कानून बनने के बाद ही प्रस्तावित व्यवस्था लागू हो सकेगी। विधेयक का आगे का संसदीय सफर तय करेगा कि मासिक धर्म अवकाश की अंतिम अवधि और नियम क्या होंगे।
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