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दुकानदार ने मांगे EXTRA पैसे तो छोड़ देंगे UPI! 76% ग्राहकों ने कहा- अब फिर से चलाएंगे कैश और कार्ड!

देशभर में 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने जा रहा है। हालांकि वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह शुल्क मर्चेंट को खुद देना होगा और ग्राहक से नहीं वसूला जाएगा, लेकिन एक नए सर्वे ने बड़ी आशंका जता दी है। LocalCircles के हालिया सर्वे के अनुसार, यदि दुकानदार MDR का बोझ ग्राहकों पर डालते हैं, तो 4 में से 3 लोग (76%) UPI छोड़कर कैश, डेबिट या क्रेडिट कार्ड जैसे अन्य विकल्पों को अपना लेंगे।

जानिए किस भुगतान पर कितना लगेगा अलग से MDR चार्ज

नियम के मुताबिक, ₹2,000 से अधिक के हर मर्चेंट UPI भुगतान पर 0.4% MDR लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 तय की गई है। उदाहरण के तौर पर ₹5,000 की खरीदारी पर ₹20, ₹50,000 पर ₹200 और ₹75,000 या उससे अधिक के बिल पर अधिकतम ₹300 का MDR चार्ज बनेगा। यह शुल्क मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, फर्नीचर, ट्रैवल और महंगे सामान की खरीदारी को प्रभावित करेगा। वहीं ₹100 से ₹1,500 तक की दैनिक खरीदारी, आपसी पैसे ट्रांसफर (P2P) और महीने में ₹1 लाख तक रिसीव करने वाले छोटे दुकानदारों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

सर्वे में बोले 76 प्रतिशत ग्राहक, चार्ज मांगा तो छोड़ देंगे UPI

LocalCircles द्वारा 291 जिलों के 67,000 से अधिक UPI यूजर्स पर किए गए सर्वे में बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई है। दुकानदार द्वारा अतिरिक्त शुल्क मांगे जाने पर सिर्फ 14% लोग ही अतिरिक्त रकम देकर UPI से भुगतान जारी रखने को तैयार हैं। बाकी 76% लोगों ने साफ कहा कि वे कैश, कार्ड या बैंक ट्रांसफर का इस्तेमाल करेंगे या खरीदारी टाल देंगे। इससे पहले अगस्त 2026 के सर्वे में भी 53% यूजर्स ने बड़ी खरीदारी पर विकल्प बदलने का संकेत दिया था।

सिर्फ 17 प्रतिशत दुकानदार ही खुद MDR चार्ज देने को तैयार

दूसरी ओर, दुकानदारों का रुख भी सरकार के फैसले के विपरीत नजर आ रहा है। 32,796 कारोबारियों के सर्वे में केवल 17% दुकानदारों ने माना कि वे 0.4% MDR का खर्च खुद उठाएंगे। जबकि 41% ने कहा कि वे कोई शुल्क नहीं देंगे और 15% केवल 0.04% तक शुल्क सहने को तैयार दिखे। अगस्त 2026 में UPI के ज़रिए कुल 24.51 अरब लेनदेन हुए थे, जिसमें से ₹8.95 लाख करोड़ के 15.51 अरब मर्चेंट भुगतान थे। ऐसे में यदि दुकानदारों और ग्राहकों के बीच खींचतान बढ़ती है, तो देश के डिजिटल पेमेंट नेटवर्क पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।

 

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