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रिकॉर्डतोड़ जीत के बाद भी क्यों नाखुश हैं टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर!

भारत ने गुवाहाटी के बरसापारा स्टेडियम में वेस्टइंडीज के खिलाफ 406 रनों के विशाल लक्ष्य को 8 विकेट से हासिल करके तीन मैचों की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली है। शुभमन गिल के नाबाद 223 रनों की आतिशी पारी और रोहित शर्मा के 101 रनों की बदौलत भारत ने यह लक्ष्य महज 43.3 ओवरों में ही हासिल कर लिया। इस मुकाबले में दोनों टीमों ने मिलकर 811 रन बनाए, लेकिन भारत के हेड कोच गौतम गंभीर टीम की इस बड़ी जीत के बावजूद खुश नजर नहीं आए।

गंभीर का पिच पर करारा हमला

मैच के बाद ब्रॉडकास्टर से बात करते हुए गौतम गंभीर ने गुवाहाटी की पिच पर खुलकर अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि क्रिकेट में बल्ले और गेंद के बीच एक निष्पक्ष मुकाबला होना चाहिए, लेकिन इस मैच में गेंदबाजों के लिए कुछ भी मौजूद नहीं था। गंभीर के मुताबिक, दर्शकों और ब्रॉडकास्टर्स के लिए 400 से अधिक रनों का स्कोर और उसका पीछा होना भले ही बेहद मनोरंजक हो, लेकिन यह असली क्रिकेट नहीं बल्कि सिर्फ बल्लेबाजी बनकर रह गया है।

वेस्टइंडीज के तीन शतकों पर भारी पड़ी गिल और रोहित की जोड़ी

मुकाबले में टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए वेस्टइंडीज ने 50 ओवर में 7 विकेट पर 405 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया था। जॉन कैम्पबेल और शाई होप ने 110 रनों की साझेदारी की और दोनों ने शतक जड़े, जबकि अमीर जंगू ने भी शतकीय पारी खेली। इसके जवाब में भारतीय कप्तान रोहित शर्मा और शुभमन गिल ने पहले विकेट के लिए महज 26 ओवरों में 255 रन जोड़कर मैच को एकतरफा बना दिया। रोहित के आउट होने के बाद गिल ने 133 गेंदों में नाबाद 223 रन बनाकर भारत को आसानी से जीत दिला दी।

खराब आंकड़ों के आधार पर युवा गेंदबाजों को न परखने की सलाह

गौतम गंभीर ने स्पष्ट किया कि इतनी सपाट पिच पर गेंदबाजों के आंकड़ों के आधार पर उनके प्रदर्शन का फैसला करना गलत होगा। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में युवा गेंदबाजों को थोड़ी सहानुभूति और अतिरिक्त मार्जिन दिया जाना चाहिए। कोचिंग स्टाफ का ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि गेंदबाजों ने अपने प्लान को सही तरीके से लागू किया या नहीं, क्योंकि सिर्फ आंकड़ों के आधार पर सख्त फैसला लेने से युवा गेंदबाजों का मनोबल टूट सकता है।

डेब्यू करने वाले आकिब नबी और गुरनूर बरार का कोच ने किया बचाव

गंभीर ने अपने डेब्यू मैच में 8.5 ओवर में 84 रन लुटाने वाले युवा गेंदबाज आकिब नबी का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें इस समय पूरे समर्थन की जरूरत है। उन्होंने बताया कि सीरीज का नतीजा तय होने से पहले दबाव वाली स्थिति में नबी को मौका दिया गया, क्योंकि विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट दबाव का ही खेल हैं। इसके साथ ही उन्होंने गुरनूर बरार का उदाहरण देते हुए कहा कि आसान माहौल में अच्छे आंकड़े निकालने के बजाय कठिन परिस्थितियों में पावरप्ले और डेथ ओवरों में गेंदबाजी करना गेंदबाजों के विकास के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है।

 

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