दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बॉयज हॉस्टल की इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के बाद दिल्ली नगर निगम ने राजधानी के पेइंग गेस्ट (पीजी) और हॉस्टलों की व्यापक जांच की। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा 7 सितंबर को जताई गई कड़ी नाराजगी और फटकार के बाद एमसीडी ने सभी 12 जोनों में अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान चलाया। इस दौरान स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट, ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (ओसीसी) और मास्टर प्लान फॉर दिल्ली (एमपीडी) के नियमों के अनुपालन की बारीकी से जांच की गई, जिसमें सुरक्षा मानकों को लेकर बेहद लापरवाही भरे तथ्य उजागर हुए हैं।
99 फीसदी इमारतों के पास नहीं है अग्नि सुरक्षा मंजूरी
इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एमसीडी सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक, राजधानी में जांचे गए कुल 2,453 पीजी इमारतों में से महज 1.2 प्रतिशत यानी केवल 31 इमारतों के पास ही दिल्ली फायर सर्विस का फायर एनओसी मिला है। इसका सीधा अर्थ है कि लगभग 99 प्रतिशत पीजी बिना किसी अग्नि सुरक्षा मंजूरी के संचालित हो रहे हैं। आपातकाल में निकलने के रास्ते और अग्निशमन उपकरणों की मौजूदगी जैसे अनिवार्य नियमों को पूरी तरह दरकिनार कर इन इमारतों में रोजाना लाखों छात्र अपनी जान जोखिम में डालकर रहने को मजबूर हैं।
बिना मंजूर नक्शे और मजबूती प्रमाण पत्र के चल रहे पीजी
जांच में यह बात भी सामने आई कि सर्वे किए गए कुल पीजी में से केवल 726 इमारतों (30 प्रतिशत से कम) के पास एमसीडी से मंजूर बिल्डिंग प्लान उपलब्ध है। इमारत के भार और दबाव झेलने की क्षमता को प्रमाणित करने वाला स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट तो केवल 8 इमारतों के पास ही पाया गया। तंग गलियों में बिना किसी स्वीकृत नक्शे और सुरक्षा योजना के कई मंजिला विशालकाय पीजी खड़े कर दिए गए हैं, जो किसी भी प्राकृतिक आपदा या हादसे के समय बड़े जानमाल के नुकसान का कारण बन सकते हैं।
शैक्षणिक इलाकों और साउथ कैंपस की बेहद खतरनाक स्थिति
जोन-वार आंकड़ों में स्थिति और भी चिंताजनक नजर आती है। दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस वाले सिविल लाइन्स जोन में सबसे ज्यादा 608 पीजी मिले, जिनमें से 364 के पास मंजूर नक्शा, 28 के पास फायर एनओसी और 27 के पास रेगुलराइजेशन अप्रूवल है, लेकिन स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेट शून्य है। वहीं केशव पुरम जोन के 410 पीजी में से सिर्फ 54 के पास मंजूर प्लान, दो के पास फायर एनओसी और दो के पास स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेट है। डीयू साउथ कैंपस, आईआईटी और जेएनयू से जुड़े साउथ जोन के 390 पीजी में से किसी के पास भी न तो फायर क्लियरेंस है, न ही बिल्डिंग प्लान, ऑक्यूपेंसी या स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट।
विश्वविद्यालयों में हॉस्टलों की कमी से पनपा अवैध कारोबार
सत्य निकेतन हादसे का मुख्य कारण भी इमारत का बिना स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी और केवल एक निकास मार्ग के होना था। देश भर से लाखों छात्र दिल्ली की नामी यूनिवर्सिटीज में पढ़ने आते हैं, परंतु डीयू, जेएनयू जैसे संस्थानों में पर्याप्त हॉस्टल सुविधा न होने के कारण छात्र इन निजी पीजी में रहने को मजबूर हैं। इसी मजबूरी का फायदा उठाकर नियमों को ताक पर रखकर घरों में अवैध रूप से पीजी का कारोबार फैला हुआ है, जो छात्रों की सुरक्षा के लिए एक निरंतर बना हुआ गंभीर खतरा है।
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