भारतीय रिकर्व तीरंदाज धीरज बोम्मादेवरा ने मैक्सिको के साल्टिलो में आयोजित आर्चरी वर्ल्ड कप फाइनल 2026 में इतिहास रच दिया है। रविवार को खेले गए पुरुषों के व्यक्तिगत रिकर्व के रोमांचक फाइनल मुकाबले में 25 वर्षीय धीरज ने जापान के नकानेशी जुन्या को शूट-ऑफ में 6-5 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस शानदार जीत के साथ ही धीरज आर्चरी वर्ल्ड कप फाइनल में व्यक्तिगत रिकर्व खिताब जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष तीरंदाज बन गए हैं।
19 साल बाद भारत के खाते में आया रिकर्व का व्यक्तिगत गोल्ड
विश्व कप के इस प्रतिष्ठित सीजन-एंडिंग टूर्नामेंट में धीरज भारत के अकेले प्रतिनिधि थे, जहाँ हर वर्ग में दुनिया के शीर्ष आठ तीरंदाजों ने हिस्सा लिया था। धीरज से पहले केवल डोला बनर्जी ही यह गौरव हासिल कर पाई थीं, जिन्होंने 2007 में दुबई में महिला रिकर्व का खिताब जीता था। 2023 और 2024 के फाइनल में खाली हाथ रहने वाले धीरज के लिए यह ऐतिहासिक जीत उनके करियर का सबसे बड़ा व्यक्तिगत खिताब है।
रोमांचक शूट-ऑफ में धीरज ने साधा सटीक निशाना
पांच सेटों तक चला फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। पहला सेट 28-28 से बराबर रहने के बाद जापानी तीरंदाज ने दूसरा सेट 29-28 से अपने नाम किया। तीसरे सेट को धीरज ने 29-28 से जीतकर वापसी की, लेकिन नकानेशी ने चौथा सेट 30-28 से जीत लिया। करो या मरो के पांचवें सेट में धीरज ने धैर्य बनाए रखा और 28-27 से जीत दर्ज कर मैच 5-5 की बराबरी पर ला दिया। इसके बाद हुए शूट-ऑफ में दबाव के क्षणों में धीरज ने परफेक्ट ’10’ का स्कोर किया, जबकि जापानी प्रतिद्वंद्वी ‘9’ ही अंक हासिल कर सके।
दिग्गजों को धूल चटाकर पहुंचे थे फाइनल में
टूर्नामेंट में दूसरी वरीयता प्राप्त धीरज ने फाइनल तक के सफर में जबरदस्त दबदबा बनाए रखा। उन्होंने क्वार्टर फाइनल में तुर्की के ओलंपिक पदक विजेता बर्किम तुमेर को 7-1 से मात दी और फिर सेमीफाइनल में फ्रांस के दो बार के ओलंपिक रजत पदक विजेता जीन-चार्ल्स वालाडोंट को भी 7-1 के अंतर से शिकस्त दी।
इस सीजन में भी भारत के लिए चमके थे धीरज
धीरज ने इस टूर्नामेंट के लिए अंटाल्या में आयोजित तीसरे वर्ल्ड कप चरण में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतकर क्वालिफाई किया था, जहाँ उन्होंने मिश्रित टीम में कुमकुम मोहोद के साथ भी गोल्ड जीता था। इस पूरे सीजन में भारत ने पुएब्ला, शंघाई, अंटाल्या और मैड्रिड चरणों में मिलाकर 4 स्वर्ण सहित कुल 7 पदक जीते थे, जिसमें धीरज भारत के एकमात्र व्यक्तिगत स्वर्ण पदक विजेता रहे थे।
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