दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की संदिग्ध मौत के मामले में एक नया और बड़ा मोड़ आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सोमवार को इस मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर जांच तेज कर दी है। इस दर्ज एफआईआर में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, उनके पुत्र आदित्य ठाकरे, तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख और मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह का नाम शामिल है। हालांकि, जांच एजेंसी ने अभी इनमें से किसी को भी औपचारिक रूप से आरोपी नहीं बनाया है, लेकिन मामले को दबाने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ में इनकी संभावित भूमिका की जांच की जाएगी।
बॉलीवुड और पुलिस अधिकारियों पर भी शिकंजा
सीबीआई की इस एफआईआर में केवल राजनीतिक हस्तियां ही नहीं, बल्कि फिल्म उद्योग और तत्कालीन पुलिस प्रशासन से जुड़े कई प्रमुख चेहरे भी शामिल हैं। एफआईआर के अनुसार, अभिनेता डिनो मोरिया, सूरज पंचोली, रिया चक्रवर्ती और शोविक चक्रवर्ती की भूमिका की भी पड़ताल की जाएगी। इसके अलावा, विवादित पूर्व अधिकारी सचिन वाजे, डीसीपी विशाल ठाकुर, एपीआई अशोक देवाड़े, पीआई जगदेव कलापड़, शैलेंद्र नगरकर, चिमाजी आधव, अर्जुन राजाने और मालवणी पुलिस स्टेशन के संबंधित कर्मचारियों को भी जांच के दायरे में रखा गया है।
सबूत मिटाने और झूठी कहानी गढ़ने के आरोप

प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि दिशा सालियान की मौत के बाद मुख्य अपराध को छुपाने के लिए एक ‘झूठी आत्महत्या की कहानी’ तैयार की गई और उसे फैलाया गया। तत्कालीन सरकार और प्रशासनिक मशीनरी पर साक्ष्यों को नष्ट करने, सरकारी फाइलों में हेरफेर करने और आरोपियों को बचाने के लिए पुलिस तंत्र व सरकारी संसाधनों का गैरकानूनी इस्तेमाल करने का संदेह है। यही वजह है कि पोस्टमार्टम प्रक्रिया से जुड़े डॉक्टर संजय जाधव, कालिना फॉरेंसिक लैब के असिस्टेंट केमिकल एनालाइजर एन.पी. भाले तथा पूर्व एसआईटी (SIT) के वरिष्ठ सदस्यों की कार्यशैली की भी गहनता से जांच होगी।
सुरक्षा गार्ड और अन्य प्रत्यक्षदर्शियों से होगी पूछताछ
सीबीआई इस पूरी साजिश की तह तक जाने के लिए रिजेंट गैलेक्सी बिल्डिंग के सुरक्षा गार्ड्स सुशील कुमार यादव और शिवमुराद गौतम उर्फ मुन्ना से पूछताछ करेगी। इनके साथ ही प्रीति राणे, प्रवीण राणे, अंकिता सातुर, इंद्रनील वैद्य, दीप अजमेरा, हिमांशु शिखारे, रेशा पाडवाल, सतवंत सिंह, नावेद मुजावर और प्रियेश राणे जैसे अन्य व्यक्तियों के नाम भी प्राथमिक जांच सूची में जोड़े गए हैं। एजेंसी उन सभी अज्ञात लोगों और अधिकारियों की पहचान करने में जुटी है, जिन्होंने मामले को दबाने या जांच को भटकाने में योगदान दिया था।
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