Kalank Chaturthi 2026: देशभर में आज गणेश चतुर्थी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इसी के साथ 12 दिन तक चलने वाले गणेशोत्सव की शुरुआत हो गई है। इस अवसर पर घरों और पूजा पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। गणेश चतुर्थी को लेकर एक विशेष धार्मिक परंपरा भी प्रचलित है, जिसके अनुसार इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने से बचना चाहिए।
चंद्र दर्शन को लेकर मान्यता
धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर चंद्र दर्शन निषिद्ध माना गया है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा को देखने वाले व्यक्ति पर झूठा आरोप या कलंक लग सकता है। इसी वजह से गणेश चतुर्थी को कई स्थानों पर कलंक चतुर्थी भी कहा जाता है।
चंद्रमा को गणेशजी ने दिया था श्राप
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान गणेश अपने वाहन मूषक पर सवार होकर जा रहे थे। रास्ते में मूषक किसी चीज से ठोकर खाकर गिर गया और गणेशजी भी नीचे गिर पड़े। यह देखकर चंद्रदेव हंसने लगे। मान्यता है कि चंद्रमा को अपने रूप और सुंदरता पर अभिमान था। उनका यह व्यवहार भगवान गणेश को पसंद नहीं आया और उन्होंने चंद्रदेव को श्राप दे दिया कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन जो व्यक्ति चंद्रमा के दर्शन करेगा, उस पर झूठा कलंक लग सकता है।
क्षमा मांगने पर सीमित हुआ श्राप
श्राप मिलने के बाद चंद्रदेव ने भगवान गणेश से क्षमा मांगी। इसके बाद गणेशजी ने अपना श्राप पूरी तरह समाप्त नहीं किया, लेकिन उसके प्रभाव को सीमित कर दिया। धार्मिक मान्यता के अनुसार तभी से गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन से बचने की परंपरा चली आ रही है।
गणेश पूजा का है विशेष महत्व
गणेश चतुर्थी पर भक्त भगवान गणेश की पूजा, आरती और मंत्र जाप करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि विघ्नहर्ता गणेश की आराधना करने से जीवन के संकट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
गलती से चांद दिख जाए तो न घबराएं
अगर अनजाने में गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा दिखाई दे जाए तो घबराने की जरूरत नहीं मानी जाती। धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान गणेश की पूजा कर उनसे क्षमा मांगने और गणेश मंत्र का जाप करने की सलाह दी जाती है। कुछ धार्मिक मान्यताओं में झूठे कलंक से मुक्ति के लिए भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी स्यामंतक मणि की कथा सुनने या पढ़ने का भी उल्लेख मिलता है।
गणेशजी का मूल बीज मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः
विघ्न नाश करने का मंत्र
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ.
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
गणेश गायत्री मंत्र
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो बुद्धि प्रचोदयात्॥
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