भारत की उत्तरी सीमा पर चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने अपनी सैन्य मौजूदगी में बड़ी कटौती की है। रक्षा मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट (2025-26) के आंकड़ों के अनुसार, ड्रैगन ने सीमा के अग्रिम मोर्चों से अपने सैनिकों की संख्या कम कर दी है। यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब सैन्य तनाव में क्रमिक नरमी के बीच चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) में हिस्सा लेने सात साल बाद शनिवार को भारत पहुंचे हैं।
LAC पर अब कितने चीनी सैनिक मौजूद?
323 पृष्ठों की इस वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है कि सीमा पर अब PLA की केवल 10 ‘कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड’ ही अग्रिम मोर्चों पर तैनात हैं। इसके अतिरिक्त 10 अन्य ब्रिगेड को LAC से दूर उनके पारंपरिक प्रशिक्षण क्षेत्रों में रखा गया है। सैन्य आंकड़ों के अनुसार, सीमा पर इस समय लगभग 40,000 से 50,000 चीनी जवान तैनात हैं, जबकि इतनी ही संख्या में सैनिक प्रशिक्षण क्षेत्रों में मौजूद हैं।
ऐतिहासिक गतिरोध के मुकाबले में बड़ी राहत
पूर्वी लद्दाख में हुए ऐतिहासिक सैन्य गतिरोध के दौर से तुलना करें तो यह संख्या काफी कम है। अक्टूबर 2024 में हुए disengagement (सैनिकों को पीछे हटाने के) समझौते से पहले, चीन ने अकेले लद्दाख सेक्टर में 60,000 से अधिक घातक सैनिक झोंक रखे थे। हालांकि रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में पिछले साल की कुल संख्या का सीधा जिक्र नहीं है, लेकिन दोनों देशों के बीच हुए समझौतों के बाद सीमा पर जमीनी स्थिति में सुधार स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया है।
चार साल बाद सुधरे द्विपक्षीय संबंध
चार साल से भी अधिक समय तक चले इस सीमा विवाद ने भारत और चीन के बीच राजनयिक व आर्थिक संबंधों को पिछले छह दशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा दिया था। अक्टूबर 2024 में सभी विवादित बिंदुओं से पीछे हटने की सहमति के बाद दोनों देशों के रिश्तों में जमी बर्फ पिघलनी शुरू हुई। इसी सकारात्मक बदलाव की बदौलत राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यह ऐतिहासिक भारत यात्रा संभव हो सकी है, जिसे दोनों देशों के बीच संबंधों के नए दौर की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
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