मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और तेल ठिकानों पर हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड ऐनालिसिस सेल (PPAC) के अनुसार, 8 सितंबर को इंडियन बास्केट क्रूड की कीमत बढ़कर 100.75 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई, जो शुक्रवार को 101 डॉलर के स्तर को पार कर गई थी। मई के बाद यह पहला मौका है जब इंडियन बास्केट 100 डॉलर के पार निकला है। कमोडिटी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पूरे सितंबर महीने में औसतन दाम 100 डॉलर से ऊपर बने रहते हैं, तो अक्टूबर में देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में 3 से 5 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की जा सकती है।
जुलाई के बाद 23 फीसदी महंगा हुआ क्रूड ऑयल
जुलाई महीने के बाद से इंडियन बास्केट की कीमतों में करीब 23 प्रतिशत का बड़ा उछाल दर्ज किया गया है। जुलाई में औसतन कच्चा तेल 82.04 डॉलर प्रति बैरल था, जिसमें अब तक लगभग 18 डॉलर प्रति बैरल का इजाफा हो चुका है। इससे पहले अप्रैल में इंडियन बास्केट का औसत मूल्य 114.48 डॉलर और मई में 106.23 डॉलर प्रति बैरल था, जबकि जून, जुलाई और अगस्त में यह क्रमशः 83.22 डॉलर, 82.04 डॉलर और 90.19 डॉलर रहा। हालांकि अप्रैल के मुकाबले वर्तमान कीमतें 12 फीसदी कम हैं, लेकिन घरेलू ईंधन दरें बढ़ाने के लिए क्रूड का 100 डॉलर होना ही पर्याप्त है।
मिडिल ईस्ट संकट और सऊदी रिफाइनरी पर हमले का असर
कच्चे तेल की कीमतों में आए इस तेज उछाल के पीछे मिडिल ईस्ट में बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव और सऊदी अरब की जिजान रिफाइनरी पर हुए हालिया हमले जिम्मेदार हैं। 4,00,000 बैरल दैनिक क्षमता वाली इस रिफाइनरी पर यमनी सेना के हमले से आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ी है, जिससे खाड़ी का कच्चा तेल 99 डॉलर के पार और अमेरिकी क्रूड 3 फीसदी चढ़कर 94 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। हालांकि, भारत के पास अब बहुस्तरीय सप्लायर मौजूद होने के कारण कच्चे तेल की भौतिक आपूर्ति में फिलहाल कोई संकट नहीं है।
होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की नाकेबंदी की चेतावनी से गहराया संकट
वैश्विक तेल आपूर्ति तंत्र को दूसरा बड़ा झटका ईरान की घोषणा से लगा है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रेजाई ने होर्मुज स्ट्रेट में नया शिपिंग कॉरिडोर और पर्शियन गल्फ में समुद्री निषेध क्षेत्र बनाने की चेतावनी दी है। अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों और मिसाइल चेतावनियों के बीच इस अहम जलमार्ग में तेल टैंकरों का आवागमन बाधित होने के संकेत मिले हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार की इस अनिश्चितता ने घरेलू स्तर पर आम जनता के लिए ईंधन महंगा होने का सीधा खतरा पैदा कर दिया है।
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