त्योहारी सीजन के बीच अपना घर बनाने का सपना देख रहे आम लोगों की जेब पर बोझ और बढ़ने वाला है। सीमेंट कंपनियों ने हाल ही में सीमेंट की कीमतों में इजाफा किया है और अक्टूबर में इसके दाम और बढ़ाने की तैयारी है। रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर में अखिल भारतीय स्तर पर सीमेंट के औसत व्यापार मूल्य में ₹7 प्रति बैग की बढ़ोतरी हुई, जिससे औसतन भाव ₹356 प्रति बैग तक पहुंच गया। वहीं, ब्रोकरेज फर्म सेंट्रम की रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर में सीमेंट के दाम में ₹5 से लेकर ₹20 प्रति बोरी तक की अतिरिक्त वृद्धि दर्ज की जा सकती है।
जानिए किस क्षेत्र में कितना बढ़ा दाम
जुलाई और अगस्त के महीनों में सीमेंट की कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई थीं, लेकिन सितंबर में क्षेत्रीय स्तर पर मिला-जुला असर देखने को मिला। सितंबर के दौरान दक्षिण भारत में सीमेंट के दामों में सबसे ज्यादा ₹11 प्रति बोरी का उछाल आया। इसके अलावा पश्चिम भारत में ₹9 प्रति बोरी, जबकि मध्य, पूर्वी और उत्तरी भारत में ₹5 प्रति बोरी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रेड और नॉन-ट्रेड दोनों सेक्टरों में कीमतें बढ़ी हैं, हालांकि कई स्थानों पर डीलरों ने टारगेट पूरा करने के लिए ग्राहकों को पुरानी दरों पर ही माल बेचा है।
दिल्ली-एनसीआर में निर्माण पर बैन से मांग घटने का खतरा
सीमेंट की कीमतों में यह तेजी ऐसे समय में देखने को मिल रही है जब दिल्ली-एनसीआर में कड़े प्रदूषण नियंत्रण नियम लागू होने वाले हैं। दिल्ली सरकार ने 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक (92 दिनों के लिए) धूल उड़ाने वाले निर्माण और तोड़-फोड़ कार्यों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। इसके अलावा, 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक (42 दिनों के लिए) सभी प्रकार के सिविल निर्माण पर पूर्ण पाबंदी रहेगी। इस कारण आने वाले महीनों में दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में सीमेंट की मांग में भारी गिरावट आना तय माना जा रहा है।
ईंधन की बढ़ती लागत बनी दाम बढ़ाने की वजह
मांग घटने के खतरे के बावजूद कंपनियां कीमतें बढ़ाने पर मजबूर हैं, जिसका मुख्य कारण हाल के हफ्तों में ईंधन (फ्यूल) की लागत में हुई भारी बढ़ोतरी है। सेंट्रम की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियों को अपना मुनाफा बनाए रखने के लिए दरें बढ़ाना जरूरी हो गया है। वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में सीमेंट की मांग सुस्त रहने के बाद सितंबर के अंत में गतिविधियों में कुछ तेजी देखी गई, जिससे कंपनियों को अक्टूबर में कीमतें बढ़ाने का मौका मिल गया है। हालांकि, ये नई दरें बाजार में कितनी टिक पाती हैं, यह आगे की कुल मांग और डीलरों के रुख पर निर्भर करेगा।
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