PM Modi Extends Ganesh Chaturthi Greetings: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भगवान गणेश को विघ्नहर्ता बताते हुए कामना की कि यह पर्व सभी के जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह लेकर आए तथा देश निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता रहे।
PM मोदी ने सोशल मीडिया पर दी शुभकामनाएं
प्रधानमंत्री की ओर से ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा गया, “देशवासियों को गणेश चतुर्थी की अनंत शुभकामनाएं। विघ्नहर्ता के दर्शन और पूजन का यह पावन पर्व सबके जीवन में नई ऊर्जा और नए उत्साह का संचार करे। उनके दिव्य आशीर्वाद से सभी के प्रयास सफल हों और राष्ट्र निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता रहे, यही कामना है। गणपति बाप्पा मोरया!”
देशवासियों को गणेश चतुर्थी की अनंत शुभकामनाएं। विघ्नहर्ता के दर्शन और पूजन का यह पावन पर्व सबके जीवन में नई ऊर्जा और नए उत्साह का संचार करे। उनके दिव्य आशीर्वाद से सभी के प्रयास सफल हों और राष्ट्र निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता रहे, यही कामना है। गणपति बाप्पा मोरया!… pic.twitter.com/5biHnkWHJ4
— Narendra Modi (@narendramodi) September 14, 2026
श्लोक भी किया शेयर
पीएम मोदी की ओर से आदि शंकराचार्य द्वारा रचित ‘गणेश पञ्चरत्नम्’ स्तोत्र का पहला श्लोक भी साझा किया गया है। इसमें भगवान गणेश की स्तुति करते हुए उन्हें भक्तों के संकट और अशुभ का नाश करने वाले विनायक के रूप में नमन किया गया है।
आठवीं शताब्दी में रचना
‘गणेश पञ्चरत्नम्’ स्तोत्र की रचना आठवीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने की थी। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धि और मुक्ति के दाता के रूप में स्तुति करने के लिए इसे ‘पंचरत्न’ के रूप में लिखा गया है, जिसमें पांच श्लोक हैं। इसका पहला पद ब्रह्ममुहूर्त में श्रद्धा के साथ पढ़ने का विधान बताया गया है।
पहले श्लोक का भाव
स्तोत्र के पहले श्लोक में भगवान गणेश के हाथों में आनंद स्वरूप मोदक धारण करने, भक्तों को मुक्ति प्रदान करने और मस्तक पर चंद्रमा के आभूषण से सुशोभित होने का वर्णन है। उन्हें संसार और भक्तों की रक्षा करने वाला बताया गया है।
विघ्नों के नाशक विनायक
श्लोक में भगवान गणेश को स्वयं सबके एकमात्र स्वामी बताया गया है। इसमें गज रूपी दैत्य यानी महासुर गजासुर के विनाश का भी जिक्र है। साथ ही शरण में आने वाले भक्तों के अशुभ और संकट का तुरंत नाश करने वाले श्री विनायक को नमन किया गया है।
क्या है श्लोक
“मुदाकरात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकं, कलाधरावतंसकं विलासिलोकरक्षकम्। अनायकैकनायकं विनाशितेभदैत्यकं, नताशुभाशुनाशकं नमामि तं विनायकम्॥”
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