प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS समिट के ओपन सेशन को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया में बढ़ता तनाव आम लोगों की जिंदगी को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने कहा कि महामारी, जलवायु आपदाओं और सप्लाई चेन में आई रुकावटों ने साफ कर दिया है कि आज की आपस में जुड़ी दुनिया में किसी एक क्षेत्र का संकट दूसरे देशों तक भी पहुंच सकता है। PM ने BRICS के विस्तृत परिवार में शामिल सभी देशों का स्वागत करते हुए कहा कि अलग-अलग संस्कृतियों और परंपराओं का एक मंच पर आना संगठन की बढ़ती ताकत और वैश्विक विश्वास को दिखाता है।
चार स्तंभों पर आगे बढ़ा भारत की अध्यक्षता वाला BRICS
PM मोदी ने कहा कि भारत की अध्यक्षता में BRICS के एजेंडे को चार प्रमुख स्तंभों- रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी के आधार पर आगे बढ़ाया गया। संकटों से पहले तैयारी को लेकर ‘BRICS इंटीग्रेटेड अर्ली वार्निंग सिस्टम’ बनाने पर सहमति बनी है। आपदा प्रबंधन के लिए अर्ली वार्निंग डेटा इंटीग्रेशन गाइडलाइंस भी तैयार की गई हैं। उन्होंने छोटे उद्यमों को ज्ञान, वित्त और नए बाजारों से जोड़ने के लिए BRICS MSME Cooperation Portal की पहल का जिक्र किया। इसके अलावा अलग-अलग शहरों के बीच बेहतर व्यवस्थाओं और अनुभवों को साझा करने के लिए BRICS Urban Mobility Hub की स्थापना की गई है।
क्लीन एनर्जी से कृषि तक, टिकाऊ विकास पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारतीय परंपरा में प्रकृति को मां का दर्जा दिया गया है और विकास तथा पर्यावरण को एक-दूसरे का विरोधी नहीं माना जाता। इसी सोच के तहत BRICS में मानव विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन पर जोर दिया गया है। उन्होंने स्मार्ट ग्रिड और एनर्जी स्टोरेज के लिए BRICS Digital Centre of Excellence का उल्लेख किया, जो स्वच्छ ऊर्जा व्यवस्था को अधिक भरोसेमंद और सुलभ बनाने में मदद करेगा। PM ने Agro-Ecology और Regenerative Agriculture के Centres of Excellence का भी जिक्र किया, जो पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने पर काम करेंगे। वहीं Community-Based Climate Adaptation के सिद्धांतों के जरिए स्थानीय और स्वदेशी ज्ञान को जलवायु कार्रवाई से जोड़ने की बात कही गई। मोदी ने कहा कि BRICS में तैयार समाधान केवल सदस्य देशों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उनका लाभ व्यापक स्तर पर पूरी दुनिया को मिलना चाहिए।
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