पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद हत्या के आरोपी विशाल द्वारा “विजय जुलूस” निकालने और मामले के गवाहों को धमकाने का गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना पर सख्त रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा पुलिस को आदेश दिया है कि आरोपी को तुरंत हिरासत में लेकर अदालत के समक्ष पेश किया जाए। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि आरोपी के खिलाफ अगस्त में गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया गया था। इसके बावजूद पुलिस उसे गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने में ढिलाई बरत रही है।
‘सरेंडर करें, तभी सुनेंगे बात’ शीर्ष अदालत की कड़ी फटकार
मामले की सुनवाई के दौरान जब 8 सितंबर को आरोपी विशाल का पक्ष उसके वकील ने रखा, तो पीठ ने कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने आरोपी को सबसे पहले आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने और फिर जमानत की अर्जी दाखिल करने की सख्त हिदायत दी। अदालत ने जमानत मिलने के बाद शक्ति प्रदर्शन करने पर फटकार लगाते हुए कहा, “हम आपकी बात तभी सुनेंगे जब आप सरेंडर करेंगे और फिर जमानत मांगेंगे। जमानत मिलने पर इस तरह विजय जुलूस निकालना बिल्कुल गलत है।”
चरखी दादरी एसपी को 21 सितंबर तक आरोपी को पेश करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि पुलिस की ओर से अगस्त से जारी गैर-जमानती वारंट पर अब तक अमल क्यों नहीं किया गया। हालांकि, अदालत ने इस ढिलाई के कारणों पर विस्तृत टिप्पणी न करते हुए सीधा आदेश जारी किया। पीठ ने हरियाणा के चरखी दादरी जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) को निर्देश दिया कि वे गैर-जमानती वारंट की तामील सुनिश्चित करें और आरोपी विशाल को अगली सुनवाई की तारीख 21 सितंबर, 2026 को हर हाल में अदालत में पेश करें।
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