पूर्वी चंपारण के आनंद सहनी अपने परिवार के पालन-पोषण और रोजी-रोटी कमाने के लिए नेपाल गए थे। वहीं वे हादसे का शिकार हो गए। परिजनों के अनुसार, 26 अगस्त की सुबह आनंद ने अपनी पत्नी सविता देवी से आखिरी बार फोन पर बात की थी। इसके ठीक बाद परिवार को उनके त्रिशूली नदी के तेज बहाव में बह जाने की दर्दनाक सूचना मिली।
नेपाल में कई दिनों तक चला खोज अभियान
आनंद के लापता होने की खबर मिलते ही गांव और परिवार में चीख-पुकार मच गई। परिजन और स्थानीय ग्रामीण तुरंत नेपाल पहुंचे और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से त्रिशूली नदी के तटवर्ती इलाकों तथा संभावित जगहों पर लगातार कई दिनों तक तलाशी अभियान चलाया। नदी के पानी में उतरकर भी खोजबीन की गई और स्थानीय स्तर पर हर संभव प्रयास किए गए, लेकिन आनंद का कोई सुराग हाथ नहीं लगा।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ और आर्थिक संकट
आनंद अपने पूरे परिवार के अकेले कमाने वाले मुख्य सहारा थे। उनके परिवार में पत्नी, तीन छोटे बेटे, एक बेटी और पैरालिसिस (लकवा) से पीड़ित वृद्ध पिता शामिल हैं। उनका सबसे बड़ा बेटा महज 10 वर्ष का है। आनंद के अचानक दूर चले जाने से परिवार न केवल मानसिक और भावनात्मक रूप से टूट चुका है, बल्कि अब उनके सामने बच्चों की परवरिश, बुजुर्ग पिता के इलाज और घर चलाने का गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
सरकारी सहायता की उठी मांग
15 दिनों के लंबे इंतजार के बाद शव न मिलने पर परिजनों को नम आंखों से पुतले का दाह-संस्कार करना पड़ा। इस दौरान पूरा गांव गमगीन माहौल में डूबा रहा। पीड़ित परिवार और स्थानीय पंचायत समिति सदस्य विनोद सहनी ने बिहार सरकार से मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने आनंद के आश्रितों को ‘आपदा पीड़ित परिवार’ का दर्जा देते हुए नियमानुसार उचित सरकारी व आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
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