Ganesh Chaturthi 2026 Puja Samagri List: 14 सितंबर 2026 को देशभर में गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा। हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेशोत्सव मनाया जाता है। यह पर्व भगवान गणेश को समर्पित है। उन्हें प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि गणेश चतुर्थी पर विधि-विधान से गणपति बप्पा की पूजा करने से सुख-समृद्धि आती है और जीवन के कई विघ्न दूर होते हैं।
पूजा सामग्री पहले से रखें तैयार
भगवान गणपति की पूजा के समय किसी सामग्री की कमी न हो, इसके लिए पूजा से पहले ही सारी चीजें जुटा लेना बेहतर माना जाता है। भगवान गणेश की प्रतिमा, पूजा की चौकी, लाल या पीला कपड़ा, कलश, कलश के लिए जल, आम के पत्ते, नारियल, रोली, कुमकुम, हल्दी, अक्षत यानी चावल, चंदन, मौली या कलावा, दूर्वा घास, लाल फूल, फूलों की माला, धूप, अगरबत्ती, दीपक, घी या तेल, कपूर, सुपारी, पान के पत्ते, लौंग और इलायची पूजा की प्रमुख सामग्री हैं।
पंचामृत के लिए ये चीजें जरूरी
भगवान गणपति की पूजा में पंचामृत का भी विशेष महत्व माना जाता है। इसके लिए दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल रखें। इसके अलावा फल, मोदक, लड्डू, मिठाई, दक्षिणा के लिए सिक्के या रुपये, पूजा की थाली, घंटी और आरती की थाली भी पहले से तैयार रखें।
मंडप सजाने की सामग्री
भगवान गणेश की स्थापना के लिए बनाए जाने वाले मंडप को सजाने के लिए आम के पत्ते, ताजे फूल, फूलों की मालाएं और तोरण रखे जा सकते हैं। पूजा स्थल की सजावट श्रद्धा और उत्सव के माहौल को और खास बनाती है।
गणपति बप्पा को ये भोग लगाएं
भगवान गणेश को मोदक और लड्डू का भोग विशेष रूप से प्रिय माना जाता है। इसके साथ गुड़, नारियल, केला, पंचामृत, फल और सूखे मेवे भी भोग में अर्पित किए जा सकते हैं। पूजा के दौरान श्रद्धा के साथ प्रसाद चढ़ाना जरुरी माना जाता है।
दूर्वा और मोदक का विशेष महत्व
भगवान गणेश को दूर्वा और मोदक अर्पित करना विशेष शुभ माना जाता है। कई परिवारों में भगवान गणपति को दूर्वा की 21 गांठें अर्पित करने की परंपरा भी प्रचलित है। इसलिए स्थापना से पहले पर्याप्त मात्रा में ताजी दूर्वा और मोदक की व्यवस्था कर लेना अच्छा रहेगा।
स्थापना के समय दिशा का रखें ध्यान
गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की स्थापना से पहले पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें। चौकी पर स्वच्छ लाल या पीला कपड़ा बिछाकर श्रद्धा और विधि-विधान के साथ गणपति बप्पा की प्रतिमा स्थापित करें। प्रतिमा का मुख ऐसी दिशा में रखें कि पूजा करते समय भक्त का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रहे।
कलश के साथ करें पूजा
भगवान गणपति की प्रतिमा के पास कलश स्थापित करें। इसके बाद भगवान गणेश को दूर्वा, लाल फूल, सिंदूर और मोदक अर्पित करें। स्थापना के बाद नियमित रूप से गणपति बप्पा की पूजा और आरती करें। घर में सात्विक वातावरण बनाए रखते हुए पूरे श्रद्धाभाव से पूजा-अर्चना करना शुभ माना जाता है।
श्रद्धा से करें गणपति बप्पा की आराधना
मान्यता है कि सच्चे मन और श्रद्धा से भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन के विघ्न दूर होते हैं और सुख-समृद्धि आती है। ऐसे में गणेश चतुर्थी की तैयारी के दौरान पूजा सामग्री से लेकर भोग और मंडप की सजावट तक सभी जरूरी सामान पहले से जुटा लेना सुविधाजनक रहेगा।
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