मुंबई दौरे पर पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एशियाटिक सोसायटी में आयोजित ‘गणेश ज्ञानार्थी’ प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह में भारत की आर्थिक और रणनीतिक स्थिति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2014 में भारत को ‘फ्रेजाइल फाइव’ में गिना जाता था, लेकिन आज देश दुनिया की टॉप-5 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अलग-अलग क्षेत्रों में हुए बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि 15 अगस्त 2047 तक भारत को हर क्षेत्र में दुनिया के देशों से आगे ले जाने का भरोसा लोगों में पैदा हुआ है। उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए सरकार की रक्षा नीति की भी चर्चा की।
लैब में बने हीरों को लेकर उद्योगपतियों से अपील
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत का रत्न और आभूषण कारोबार करीब 6,000 साल पुराना है। उन्होंने बदलते वैश्विक बाजार में लैब में तैयार किए जाने वाले हीरों को बड़ा अवसर बताया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया कि वॉल्यूम के लिहाज से लैब-ग्रोन डायमंड का बाजार मौजूदा डायमंड मार्केट से करीब 50 गुना बड़ा हो सकता है।
उन्होंने उद्योग जगत से अपील की कि इस क्षेत्र की पूरी मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन भारत में मजबूत की जाए। इसमें मशीनरी निर्माण, हीरा उत्पादन, ज्वेलरी, ब्रांडिंग और दुनिया के प्रमुख शहरों में भारतीय कंपनियों के शोरूम तक शामिल हों। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भारत के पास इस क्षेत्र के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, पूंजी, क्षमता और उद्यमी मौजूद हैं।
भारतीय ज्ञान परंपरा को संरक्षित करने पर जोर
एशियाटिक सोसायटी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय भाषा, संस्कृति, इतिहास, स्मृति और परंपराओं को सुरक्षित रखने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि नालंदा का पुस्तकालय जलाया जा सकता है, लेकिन स्मृति और श्रुति में बसे ज्ञान को समाप्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सच्चा ज्ञान किसी विचारधारा का बंधक नहीं होना चाहिए और ज्ञान को स्वतंत्र रखा जाना जरूरी है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एशियाटिक सोसायटी के ज्ञान को देशभर तक पहुंचाने के लिए विद्वानों को जोड़ने, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से पुस्तकालयों को आपस में जोड़ने और महाराष्ट्र के गांवों में मौजूद पांडुलिपियों को संरक्षित करने की जरूरत बताई। उन्होंने ‘इंडोलॉजी’ के तहत सिक्का-विज्ञान, अभिलेख-शास्त्र, मानव-विज्ञान, इतिहास, पुरातत्व, भाषा-विज्ञान, दर्शन, साहित्य, धर्मशास्त्र और व्याकरण जैसे विषयों का उल्लेख किया।
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