ब्रिटेन के ‘एआई सिक्योरिटी इंस्टीट्यूट’ (AISI) और ‘डेली मेल’ की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, चीन में विकसित किए जा रहे कुछ एआई मॉडल्स के कमजोर सेफ्टी फीचर्स वित्तीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती पैदा कर रहे हैं। पश्चिमी देशों के एआई सिस्टम जैसे ChatGPT में बिल्ट-इन सेफ्टी गार्डरेल्स होते हैं जो हैकिंग, पासवर्ड क्रैकिंग या फ्रॉड जैसे निर्देशों को खारिज कर देते हैं। इसके विपरीत, चीनी लैब्स द्वारा जारी कुछ ओपन या आसानी से मॉडिफाई होने वाले एआई मॉडल्स के सेफ्टी लॉक्स को आसानी से डिसेबल किया जा सकता है। एक्सपर्ट्स ने आगाह किया है कि आने वाले तीन महीनों के भीतर रूसी और नाइजीरियाई हैकर्स इन अनलॉक्ड एआई मॉडल्स का दुरुपयोग करके आम जनता के बैंकिंग पासवर्ड्स क्रैक्स करने और सीधे खातों में सेंध लगाने में सक्षम हो सकते हैं।
बैंकिंग प्रणाली पर मंडराया संकट
फाइनेंशियल स्टेबिलिटी इंस्टीट्यूट की चेतावनी के मुताबिक, दुनिया की मौजूदा पारंपरिक बैंकिंग सुरक्षा प्रणालियां इतने आधुनिक एआई-आधारित साइबर हमलों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं। अगर हैकर्स एआई की मदद से एक साथ बड़े पैमाने पर डिजिटल डकैती को अंजाम देते हैं, तो बैंकों के पास अपने सर्वर बचाने और ग्राहकों के पैसों की सुरक्षा करने के लिए हफ्तों का समय नहीं, बल्कि महज कुछ ही घंटों की मोहलत होगी। एआई से लैस हैकर्स को अब जटिल कोडिंग सीखने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी; सेफ्टी लॉक हटते ही एआई सिस्टम पलक झपकते ही जटिल पासवर्ड तोड़कर फाइनेंशियल डेटा चुराने का काम खुद करने में सक्षम हो जाएगा।
हथियार की तरह देखा जा रहा AI
प्रौद्योगिकी की इस अनियंत्रित दौड़ के बीच अमेरिका अब एआई को किसी सामान्य सॉफ्टवेयर के बजाय बेहद संवेदनशील और खतरनाक हथियार के रूप में देख रहा है। इसी सुरक्षा खतरे को ध्यान में रखते हुए अमेरिकी एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने हाल ही में ब्रिटेन के सिक्योरिटी इंस्टीट्यूट को अपने सबसे एडवांस मॉडल की टेस्टिंग करने से रोक दिया है। खुद एंथ्रोपिक ने यह माना है कि इस वर्ष कुछ असमाजिक तत्वों ने उनके एआई मॉडल का इस्तेमाल खतरनाक जैविक हथियार तैयार करने के लिए करने का प्रयास किया था, जिसे समय रहते रोक लिया गया। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एआई के अनियंत्रित विकास पर समय रहते वैश्विक लगाम नहीं कसी गई, तो यह आम आदमी की वित्तीय और व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है।
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