18वें ब्रिक्स सम्मेलन (BRICS Summit) में हिस्सा लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12-13 सितंबर तक नई दिल्ली में रहेंगे. जिनपिंग के साथ 67 सदस्यों का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है, जिसमें चीनी विदेश मंत्री वांग यी और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (CPC) के अत्यंत शक्तिशाली नेता काई की शामिल हैं. 70 वर्षीय काई की को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का ‘राइट हैंड मैन’ माना जाता है. वह चीन में सबसे बड़े राजनीतिक निर्णय लेने वाली 7-सदस्यीय पोलित ब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी में 5वें नंबर के नेता हैं.
शी जिनपिंग तक सीधी पहुंच और डी-फैक्टो चीफ ऑफ स्टाफ की भूमिका
काई की कम्युनिस्ट पार्टी के सेक्रेटेरिएट के पहले नंबर के सदस्य होने के साथ-साथ सीपीसी सेंट्रल कमेटी के जनरल ऑफिस के निदेशक भी हैं. यह कार्यालय शीर्ष नेतृत्व के कार्यक्रमों, महत्वपूर्ण दस्तावेजों और आंतरिक संचार की निगरानी करता है, जिससे काई की सीधी पहुंच शी जिनपिंग तक बनी रहती है. रॉयटर्स के अनुसार, काई की शी जिनपिंग के ‘डी-फैक्टो चीफ ऑफ स्टाफ’ (मुख्य स्टाफ अधिकारी) की भूमिका निभाते हैं और कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय दौरों में उनके साथ रहते हैं. जून 2026 में उन्हें सीपीसी सेंट्रल पार्टी स्कूल और नेशनल एकेडमी ऑफ गवर्नेंस का प्रमुख भी नियुक्त किया गया था.
तीन दशक पुराना राजनीतिक रिश्ता और अतीत के फैसले
जिनपिंग और काई की का राजनीतिक संपर्क करीब 30 साल पुराना है. वर्ष 1996 में जब शी जिनपिंग फुजियान प्रांत में पार्टी के डिप्टी सेक्रेटरी बने थे, तब काई की उनकी सेवा के लिए नियुक्त हुए थे. बाद में काई की ने बीजिंग के मेयर सहित कई बड़े पदों का कार्यभार संभाला. वर्ष 2017 में बीजिंग में प्रवासी मजदूरों के खिलाफ चलाए गए सख्त अभियान के कारण भी वह काफी चर्चा में रहे थे. वर्ष 2022 में वह सेक्रेटेरिएट के फर्स्ट सेक्रेटरी और 2023 में जनरल ऑफिस के निदेशक बने थे.
भारत दौरे में काई की की मौजूदगी क्यों मानी जा रही है बेहद अहम
वर्ष 2020 के सीमा विवाद के बाद से भारत और चीन के संबंधों में तनाव रहा है, हालांकि हाल के समय में दोनों पक्षों ने रिश्ते सुधारने की दिशा में प्रयास किए हैं. ऐसे माहौल में काई की की भारत मौजूदगी को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इससे पहले 31 अगस्त 2025 को तियानजिन में आयोजित 25वें एससीओ (SCO) सम्मेलन के दौरान काई की ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी. दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता की संभावना जताई जा रही है, जो दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों को सुधारने का जरिया बन सकती है.
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