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शाही ठाठ से होगी वैश्विक दिग्गजों की मेजबानी, नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स सम्मेलन के मेहमानों को जयपुर के चांदी के बर्तनों में परोसा जाएगा व्यंजन

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियां केवल कूटनीतिक वार्ताओं और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं हैं. विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधियों के स्वागत के लिए भारतीय आतिथ्य और पारंपरिक हस्तशिल्प को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है. सम्मेलन में हिस्सा लेने आ रहे वैश्विक नेताओं के लिए भोजन की खास व्यवस्था की गई है, जिसमें राजस्थान की समृद्ध धातु कला की छाप देखने को मिलेगी. मेहमानों के लिए जयपुर में विशेष रूप से तैयार कराए गए चांदी से प्लेटेड बर्तन और कटलरी का उपयोग किया जाएगा, जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की सांस्कृतिक भव्यता को प्रदर्शित करेंगे.

जयपुर की कंपनी ने तैयार किए खास बर्तन

इस वैश्विक आयोजन के लिए जयपुर स्थित ‘अरुण्स ग्रुप ऑफ कंपनीज’ ने ये खास सिल्वर-प्लेटेड बर्तन और कटलरी तैयार किए हैं. कंपनी के सीईओ के अनुसार, इन बर्तनों की अवधारणा और डिजाइन को परोसे जाने वाले विशेष भारतीय व्यंजनों के अनुरूप ढाला गया है. कलेक्शन में साधारण या आधुनिक डिजाइनों के बजाय भारत की पारंपरिक और उत्सव शैली वाले अलंकृत सिल्वरवर्क को शामिल किया गया है. भोजन परोसने के लिए बड़े सजावटी कटोरे और ढक्कन वाले पात्रों को खास तौर पर तैयार किया गया है.

वैश्विक मंच पर भारतीय हस्तशिल्प का प्रदर्शन

अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के माध्यम से भारत की विरासत कला और कुशल कारीगरों की प्रतिभा को एक बड़ा मंच मिला है. जयपुर अपनी सदियों पुरानी आभूषण निर्माण कला, हस्तशिल्प और जटिल धातु कार्य तकनीकों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है. यह हस्तशिल्प कला पीढ़ियों से चली आ रही है. ब्रिक्स सम्मेलन में इन कारीगरों की कला का प्रदर्शन भारत की उस परंपरा को उजागर करता है जहां कला, संस्कृति और दैनिक जीवन का अनोखा संगम देखने को मिलता है.

कूटनीति के साथ दिखेगा भारतीय कला का रंग

यह खास क्राफ्टेड कलेक्शन ब्रिक्स प्रतिनिधियों के आतिथ्य अनुभव में एक विशिष्ट भारतीय पहचान जोड़ेगा. मेहमानों को परोसे जाने वाले इस सेट में कई तरह के कटोरे, ट्रे, प्लेट, ग्लास, सजावटी बर्तन और ढक्कन वाले कंटेनर शामिल हैं. भोजन परोसने का यह साधन केवल आतिथ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि कूटनीतिक गलियारों में भारत की समृद्ध कलात्मक परंपराओं को गर्व से प्रस्तुत करने का एक सराहनीय प्रयास भी है.

 

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