कल्पना कीजिए कि आपको हर महीने मोबाइल रिचार्ज, बिजली का बिल या कोई जरूरी भुगतान खुद करने की जरूरत न पड़े। आप अपने AI असिस्टेंट को निर्देश दें और वह आपकी ओर से UPI के जरिए पेमेंट कर दे। डिजिटल पेमेंट को और आसान बनाने के लिए इसी तरह की व्यवस्था पर काम किया जा रहा है।
प्रस्तावित सिस्टम में यूजर पहले से AI एजेंट को कुछ खास भुगतान करने की अनुमति दे सकेगा। इसके बाद AI तय नियमों के मुताबिक छोटे और नियमित पेमेंट कर पाएगा। मसलन, हर महीने मोबाइल रिचार्ज करना या तय समय पर बिजली का बिल जमा करना।
NPCI ने फिलहाल क्यों रोका सिस्टम?
इस सुविधा को लागू करने से पहले NPCI (नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को मजबूत करना चाहता है। AI को सीधे पेमेंट की क्षमता देने से गलत निर्देश, तकनीकी गड़बड़ी या साइबर अटैक की स्थिति में यूजर के पैसे पर खतरा पैदा हो सकता है।
AI सिर्फ दिए गए आदेश को दोहराता नहीं बल्कि कुछ परिस्थितियों में उसके आधार पर निर्णय भी ले सकता है। ऐसे में अगर AI ने गलत रकम भेज दी या किसी हमले की वजह से अनधिकृत भुगतान हो गया तो इसकी जिम्मेदारी तय करना जरूरी होगा।
Rogue AI से जुड़ी चिंता
इस पूरे सिस्टम में Rogue AI का खतरा भी एक अहम मुद्दा है। उदाहरण के लिए, अगर किसी यूजर ने AI को अधिकतम 1,000 रुपये तक भुगतान की अनुमति दी है लेकिन सिस्टम में गड़बड़ी या साइबर हमले के कारण उससे 10,000 रुपये का भुगतान हो जाए, तो नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
इसी वजह से NPCI AI एजेंट्स की पहचान और निगरानी के लिए एक रजिस्ट्री समेत मजबूत ऑथराइजेशन और मॉनिटरिंग व्यवस्था तैयार करने पर जोर दे रहा है। AI आधारित पेमेंट शुरू करने से पहले यह स्पष्ट करना भी जरूरी होगा कि गलती होने पर जिम्मेदारी AI डेवलपर, बैंक, पेमेंट ऐप या यूजर में से किसकी होगी।