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समुद्र में बारूद, ईरान में पनाह, पश्चिम एशिया की जंग में बाल-बाल बचे 21 भारतीय नाविक

पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य संकट के बीच समुद्र में तैनात भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। 8 और 9 सितंबर को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले भारतीय क्रू वाले तीन विदेशी ध्वजवाहक जहाजों पर हमले की खबरें सामने आई हैं। समुद्री प्रशासन निदेशालय की रिपोर्ट के अनुसार, 8 सितंबर की रात करीब 11 बजे जिम्बाब्वे के झंडे वाले कच्चे तेल के टैंकर ‘रिस्को’ पर अमेरिकी नौसैनिक कार्रवाई हुई। हालांकि, चालक दल की सूझबूझ से बड़ा हादसा टल गया। टैंकर पर सवार सभी 21 भारतीय नाविक हमले से पहले ही जहाज खाली करके ईरान के एक बंदरगाह पर सुरक्षित ठिकाने पर पहुंच गए थे, जिससे उनकी जान बच गई।

फारस की खाड़ी में फंसे भारत से जुड़े 10 जहाज

खाड़ी देशों में बिगड़ते हालात को देखते हुए भारतीय प्रशासन अलर्ट मोड पर है। रिपोर्ट के अनुसार, फारस की खाड़ी में इस समय भारतीय हित से जुड़े 10 जहाज फंसे हुए हैं। इनमें भारतीय झंडे वाले पोतों के साथ-साथ भारत की ओर आ रहे वे विदेशी जहाज भी शामिल हैं जिन पर भारतीय नाविक तैनात हैं। सरकार ने आपात स्थिति में क्रू सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकालने और त्वरित मदद पहुंचाने के मकसद से इन सभी जहाजों की पहचान पूरी कर ली है।

अब तक दर्ज हुईं दर्जनों सुरक्षा घटनाएं

रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों की शुरुआत के बाद से भारतीय जहाजों और समुद्री कर्मियों पर खतरा लगातार बढ़ा है। युद्ध की शुरुआत से लेकर अब तक भारतीय झंडे वाले जहाजों से जुड़ी 4 घटनाएं और भारतीय क्रू सदस्यों से प्रभावित करने वाली कुल 50 घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि युद्धग्रस्त समुद्री मार्गों पर भारतीय नाविकों के लिए जोखिम किस हद तक बढ़ चुका है।

पीएम मोदी ने ईरान के सामने रखी नाविकों की सुरक्षा

नाविकों पर बढ़ते खतरे के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने भारत आए ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से नई दिल्ली में द्विपक्षीय बातचीत की। 11 सितंबर को हुई इस बैठक के दौरान पीएम मोदी ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा और पश्चिम एशिया के ताजा हालात पर गहराई से चर्चा की। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से जहाजों की निर्बाध और स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।

 

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