Hartalika Teej & Ganesh Chaturthi 2026: 14 सितंबर 2026, सोमवार का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। इस दिन गणेश चतुर्थी और हरतालिका तीज एक साथ मनाई जाएगी।
गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की आराधना होगी, जबकि सुहागिन महिलाएं और विवाह योग्य कन्याएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर हरतालिका तीज का व्रत रखेंगी। पंचांग के अनुसार, दोनों पर्वों का एक ही दिन पड़ना खास संयोग माना जा रहा है।
गणेश चतुर्थी का महत्व
सनातन परंपरा में गणेश चतुर्थी को भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धि, समृद्धि और शुभता का देवता माना गया है।
मान्यता है कि किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेश जी की पूजा करने से बाधाएं दूर होती हैं। इस दिन घर या पूजा स्थल पर गणेश प्रतिमा स्थापित कर पूजा, आरती और मंत्र जाप किया जाता है।
गणेश पूजा का मुहूर्त
14 सितंबर को भगवान गणेश की पूजा के लिए मुहूर्त सुबह 11:02 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक बताया गया है। इस दौरान श्रद्धालु विधि-विधान से गणेश जी की पूजा कर सकते हैं।
हरतालिका तीज की मान्यता
हरतालिका तीज भगवान शिव और माता पार्वती के पवित्र मिलन से जुड़ा पर्व है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी।
इसी आस्था के चलते महिलाएं शिव-पार्वती की पूजा कर व्रत रखती हैं। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए व्रत और पूजा करती हैं।
हरतालिका तीज का मुहूर्त
इस दिन प्रातःकालीन पूजा का समय सुबह 6:05 बजे से 7:06 बजे तक बताया गया है। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को अपनी सामर्थ्य के अनुसार पूजा, मंत्र जाप और कथा श्रवण करना चाहिए।
गणेश जी को क्या चढ़ाएं
गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश को दूर्वा, मोदक, फल और फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। वहीं हरतालिका तीज पर शिव-पार्वती को वस्त्र, पुष्प और श्रृंगार सामग्री अर्पित करने की परंपरा है।
नकारात्मकता से बचें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दोनों पर्वों के दौरान क्रोध, अहंकार और नकारात्मक विचारों से बचना चाहिए। गणेश चतुर्थी पर श्रद्धापूर्वक पूजा करने के साथ अनावश्यक रूप से चंद्र दर्शन से बचने की परंपरा भी कई पंचांगों में बताई गई है।
हरतालिका तीज पर सावधानी
मान्यताओं के अनुसार हरतालिका तीज व्रत में काले, सफेद और नीले रंग के वस्त्र पहनने से बचना चाहिए। नमक और चीनी का सेवन वर्जित माना गया है। व्रत के दौरान वाद-विवाद या किसी का अपमान करने से बचने और अनाज का सेवन न करने की मान्यता है। दिन में सोने से बचना चाहिए और रात में जागरण को फलदायी माना जाता है।
दूध और फल का सेवन करने से भी बचने की मान्यता बताई गई है। व्रतधारी को मन में किसी प्रकार का खोट नहीं रखना चाहिए। मान्यता है कि एक बार हरतालिका तीज का व्रत शुरू करने के बाद इसे जीवनभर जारी रखना चाहिए।
गणेश चतुर्थी पर क्या न करें?
गणेश चतुर्थी पर गणेश जी को चंद्रमा से संबंधित चीजें अर्पित करने से बचने की मान्यता है। उनके भोग में लहसुन-प्याज का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और पूजा में तुलसी का प्रयोग भी नहीं किया जाता।
गणेश जी की पूजा और भोग में टूटे हुए चावल का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। साथ ही काले या नीले रंग के वस्त्र और केतकी के फूल गणेश जी को अर्पित नहीं करने की धार्मिक मान्यता है।
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