पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बांग्लादेश की जेल में बंद संत चिन्मय कृष्ण दास का मुद्दा उठाते हुए बंगाली हिंदुओं के इतिहास और विभाजन की त्रासदी को याद किया। शनिवार को राजारहाट गोपालपुर में गणेश पूजा के उद्घाटन कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने के दौरान चिन्मय कृष्ण दास की आंसुओं ने दुनिया भर के सनातनियों को झकझोर दिया। उन्होंने अपने परिवार के विस्थापन का जिक्र करते हुए बताया कि उनकी मां गायत्री देवी को भी बंटवारे के समय हिंदू होने के कारण सब कुछ छोड़कर भारत आना पड़ा था।
अधिकारी ने कहा कि अगर श्यामा प्रसाद मुखर्जी और स्वामी प्रणवानंद का संघर्ष न हुआ होता और बंगाल का एक हिस्सा भारत में शामिल नहीं हुआ होता, तो संभव है कि आज बंगाली हिंदुओं की स्थिति भी चिन्मय कृष्ण दास जैसी होती। उन्होंने दावा किया कि उनके परिवार को उस इलाके से निकलना पड़ा था, जो अब बांग्लादेश का हिस्सा है। उनके मुताबिक, उनकी मां अपने पिता के साथ केवल पहने हुए कपड़ों में भारत आई थीं।
लेफ्ट और टीएमसी पर इतिहास मिटाने का आरोप
CM शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि लंबे समय तक सत्ता में रही वाम मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस की सरकारों ने बंगाली हिंदुओं के लिए अलग मातृभूमि के आंदोलन में श्यामा प्रसाद मुखर्जी और स्वामी प्रणवानंद की भूमिका को लोगों की स्मृति से हटाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अब उस परंपरा और विरासत को फिर से सामने लाने की जरूरत है।
नवंबर 2024 से हिरासत में हैं चिन्मय कृष्ण दास
चिन्मय कृष्ण दास नवंबर 2024 से बांग्लादेश में हिरासत में हैं और उनके खिलाफ बांग्लादेश से जुड़े अपराधों का मामला चल रहा है। पिछले सप्ताह उनकी मां के निधन के बाद उन्हें अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पांच घंटे की पैरोल दी गई थी। इसी दौरान मां के शव से लिपटकर रोते हुए उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुईं। अधिकारी ने इन्हीं तस्वीरों का हवाला देते हुए कहा कि इस दृश्य ने सनातन समुदाय को गहराई से प्रभावित किया।
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