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हाथ में हाथ, चेहरे पर मुस्कान, दिल्ली में मोदी-पुतिन-जिनपिंग की ऐतिहासिक तस्वीर से हिला पाकिस्तान

नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले ही दिन एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने वैश्विक कूटनीति में हलचल मचा दी है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सम्मेलन में पहुंचते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग एक साथ मंच पर नजर आए। लंबे समय से प्रतीक्षित इस ‘आरआईसी’ (रूस, भारत, चीन) फ्रेम में तीनों शीर्ष नेता एक-दूसरे का हाथ थामे बेहद गर्मजोशी के साथ ठहाके लगाते दिखे। ग्लोबल मीडिया में आते ही ‘साल की सबसे ताकतवर तस्वीर’ कही जा रही यह फोटो दुनिया की एक बड़ी आबादी और अर्थव्यवस्था की एकजुट ताकत का सशक्त प्रदर्शन करती है।

मोदी और वैश्विक नेताओं की अनूठी केमिस्ट्री

सम्मेलन स्थल पर नेताओं के बीच केवल औपचारिक संबंध ही नहीं, बल्कि एक मजबूत व्यक्तिगत केमिस्ट्री भी देखने को मिली। रेड कारपेट पर प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन को मुस्कुराते हुए साथ टहलते देखा गया, वहीं पीएम मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के साथ भी आत्मीय बातचीत की। कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर औपचारिक भाषणों और आधिकारिक बयानों की तुलना में ऐसी अनौपचारिक और आत्मीय तस्वीरें कहीं अधिक गहरा और दीर्घकालिक प्रभाव छोड़ती हैं।

पश्चिमी देशों और अमेरिका में मची हलचल

भारत, रूस और चीन के शीर्ष नेताओं की इस एकजुटता ने वाशिंगटन से लेकर यूरोपीय देशों तक चिंता बढ़ा दी है। पश्चिमी देश ब्रिक्स के इस बढ़ते प्रभाव को डॉलर के वर्चस्व और अपनी पारंपरिक आर्थिक नीतियों के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देख रहे हैं। अमेरिका के राजनीतिक गलियारों में इस बात की आशंका गहरी हो गई है कि यदि ये तीन प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं आर्थिक और रणनीतिक मोर्चे पर एक साथ आती हैं, तो वैश्विक फैसलों में पश्चिमी दुनिया का एकतरफा दबदबा कमजोर पड़ेगा। इसके अतिरिक्त, यह तस्वीर ‘ग्लोबल साउथ’ की उस बुलंद आवाज को दर्शाती है जो स्पष्ट करती है कि उभरती अर्थव्यवस्थाएं अब अपने निर्णय स्वयं लेने में सक्षम हैं।

भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की बड़ी जीत

यह शक्तिशाली दृश्य भारत की ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ यानी स्वतंत्र विदेश नीति का प्रत्यक्ष प्रमाण है। भारत किसी एक वैश्विक गुट का हिस्सा बनने के बजाय हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखता है। एक तरफ भारत अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ ‘क्वाड’ मंच पर सक्रियता से सहयोग करता है, तो दूसरी तरफ ब्रिक्स (BRICS) और एससीओ (SCO) के जरिए रूस और चीन के साथ वैश्विक मुद्दों पर संवाद बनाए रखता है। पीएम मोदी की यह नीति स्पष्ट करती है कि भारत किसी भी महाशक्ति के दबाव में आए बिना अपने संतुलन और वैश्विक संबंधों को पूरी मजबूती से कायम रखता है।

 

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