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डॉलर के वर्चस्व पर BRICS का बड़ा प्रहार! UPI जैसी तकनीक से सदस्य देशों में होगा व्यापार

ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता घटाने और सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने को लेकर विचार-विमर्श तेज हो गया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ब्रिक्स देशों से अपने-अपने डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने और लोकल करेंसी में लेन-देन को बढ़ावा देने का आह्वान किया है। ब्रिक्स का मुख्य एजेंडा हमेशा से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर के वर्चस्व को कम करना रहा है, जिसे गति देने के लिए अब सीमा पार डिजिटल भुगतान और सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) को एकीकृत करने के विकल्पों पर मंथन चल रहा है।

फास्ट पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने की तैयारी

भारत में जिस प्रकार यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने डिजिटल वित्तीय गतिविधियों को सुगम बनाया है, ठीक उसी तर्ज पर ब्रिक्स राष्ट्रों के अलग-अलग ‘फास्ट पेमेंट सिस्टम’ को एक-दूसरे से जोड़ने की योजना है। इससे सदस्य देशों के बीच व्यापारिक भुगतान त्वरित और सुगम हो जाएगा, जिससे डॉलर की आवश्यकता में भारी कमी आएगी। हालांकि, संगठन का मुख्य ध्यान किसी नई साझी करेंसी को लॉन्च करने के बजाय अपनी-अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में डिजिटल भुगतान की व्यवस्था स्थापित करने पर है।

नेट सेटलमेंट मॉडल से कम होगा विदेशी मुद्रा का लेनदेन

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पेमेंट सिस्टम को लेकर एक और बड़े मॉडल पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है, जिससे प्रत्येक व्यापारिक सौदे के लिए बार-बार अलग से भुगतान करने की जरूरत खत्म हो सकती है। इस नए तंत्र के तहत दो देशों के बीच एक निश्चित समय अवधि के दौरान हुए कुल आयात-निर्यात का हिसाब-किताब एक साथ देखा जाएगा। इसके बाद केवल दोनों देशों के व्यापार अंतर (Net Settlement) का ही भुगतान करना होगा, जिससे विदेशी मुद्रा की खपत में भारी कमी आएगी।

ईरान ने भी दिया स्थानीय मुद्राओं में व्यापार का समर्थन

हालांकि इन प्रस्तावित पेमेंट मॉडलों पर अभी अंतिम मुहर लगनी बाकी है, लेकिन इस बार के ब्रिक्स सम्मेलन में डी-डॉलराइजेशन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सम्मेलन के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भी इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक व्यापार में अमेरिकी डॉलर की निर्भरता को समाप्त किया जाए और ब्रिक्स देश अपनी-अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में द्विपक्षीय व्यापार को प्राथमिकता दें।

 

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