India First Lights-Out Factory: टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने पुणे के सह्याद्रि पार्क कैंपस में ‘TCS इंडस्ट्रियल ऑटोनॉमी एंड इंजीनियरिंग लैब- लाइट्स-आउट फैक्टरी’ शुरू की है। इसे भारत की पहली ऐसी ‘लाइट्स-आउट फैक्टरी’ लैब बताया गया है, जहां यह दिखाया जाएगा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स की मदद से मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को बिना इंसानी दखल या बेहद कम मानवीय हस्तक्षेप के लगातार चलाया जा सकता है।
क्या है लाइट्स-आउट फैक्टरी?
आसान भाषा में कहें तो यह ऐसी फैक्टरी व्यवस्था है, जहां उत्पादन से जुड़े कई काम मशीनें, रोबोट और AI खुद संभालते हैं। TCS की नई लैब इसी तकनीक को वास्तविक परिस्थितियों में प्रदर्शित करेगी और बताएगी कि किस तरह ‘Human+AI सर्विस ऑटोनॉमी मॉडल’ के जरिए फैक्टरी के कामकाज को अधिक स्वचालित बनाया जा सकता है।
दूसरी कंपनियों को मिलेगा मौका
TCS के मुताबिक, यह भारत की पहली ऐसी लैब है जो ‘लाइट्स-आउट मैन्युफैक्चरिंग’ की तकनीकों का लाइव प्रदर्शन करेगी। दूसरी कंपनियां यहां ट्रायल और टेस्टिंग के जरिए अपने लिए AI आधारित प्रोडक्शन सिस्टम तैयार कर सकती हैं। इससे उन्हें उत्पादन प्रक्रिया में आने वाली संभावित दिक्कतों और खतरों को वास्तविक फैक्टरी में बदलाव करने से पहले समझने में मदद मिलेगी।
AI और रोबोटिक्स की भूमिका
नई लैब का एक अहम उद्देश्य यह भी है कि AI और रोबोटिक्स को रोजमर्रा के औद्योगिक कामकाज में प्रभावी तरीके से कैसे इस्तेमाल किया जाए। कंपनियां लैब में तकनीकों को आजमाकर यह देख सकती हैं कि ऑटोमेशन उनके उत्पादन, गुणवत्ता और जोखिम प्रबंधन को किस तरह प्रभावित कर सकता है।
मशीन खराब होने से पहले संकेत
इस तकनीक की मदद से कंपनियां मशीनों में संभावित खराबी का पहले ही अनुमान लगाने की दिशा में काम कर सकती हैं। इससे अचानक मशीन बंद होने और उत्पादन प्रभावित होने के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
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