Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और अटूट रिश्ते का पर्व है। इस दिन राखी बांधने की रस्म के साथ वास्तु के कुछ नियमों का भी ध्यान रखा जाता है। वास्तु शास्त्र में राखी बांधते समय भाई के बैठने की दिशा को जरुरी माना गया है। मान्यता है कि भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर हो तो यह शुभ होता है और सकारात्मकता के साथ सुख-समृद्धि से भी जोड़ा जाता है।
पूर्व दिशा को क्यों माना जाता है शुभ?
वास्तु के अनुसार पूर्व दिशा का संबंध उगते सूर्य और सकारात्मक ऊर्जा से माना जाता है। इसलिए रक्षाबंधन जैसे शुभ अवसर पर भाई का पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठना अच्छी शुरुआत और सकारात्मक सोच का प्रतीक माना जाता है। इस तरह बैठने पर बहन भी सामने बैठकर आसानी से तिलक, अक्षत और राखी की रस्म पूरी कर सकती है।
उत्तर दिशा भी मानी जाती है मंगलकारी
अगर घर की व्यवस्था के कारण भाई पूर्व दिशा की ओर मुख करके नहीं बैठ सकता, तो उत्तर दिशा का विकल्प चुना जा सकता है। वास्तु में उत्तर दिशा को सुख, समृद्धि और उन्नति से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि दिशा को लेकर परिवार में किसी तरह का तनाव या असुविधा नहीं होनी चाहिए, क्योंकि रक्षाबंधन का मुख्य उद्देश्य भाई-बहन के बीच प्रेम और अपनापन बढ़ाना है।
राखी बांधते समय इन रस्मों का रखें ध्यान
राखी बांधते समय बहन भाई के सामने बैठकर पूजा की थाली रख सकती है। सबसे पहले भाई को तिलक लगाया जाता है, इसके बाद अक्षत लगाए जाते हैं और फिर राखी बांधी जाती है। कई परिवारों में राखी बांधने के बाद भाई की आरती करने की परंपरा भी है। अंत में भाई-बहन एक-दूसरे का मुंह मीठा करवाते हैं। इन्हीं पारंपरिक रस्मों से रक्षाबंधन का उत्साह और खूबसूरती बढ़ती है।
लकड़ी की चौकी पर बैठाना माना जाता है शुभ
वास्तु मान्यताओं के अनुसार राखी बंधवाते समय भाई को लकड़ी की चौकी या आसन पर बैठाना शुभ माना जाता है। कोशिश की जाती है कि भाई सीधे जमीन पर बैठकर राखी न बंधवाए। साथ ही राखी की पूजा की थाली में दीपक रखना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि दीपक की लौ को जलाए रखना चाहिए और उसे बुझने नहीं देना चाहिए, क्योंकि अग्नि को शुभता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
भाई के पैरों की दिशा भी रखें सही
राखी बांधते समय इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि भाई के पैर बहन की ओर न हों। पूजा के दौरान भाई को आराम से बैठना चाहिए और बहन उसके सामने या उचित स्थान पर बैठकर तिलक और राखी की रस्म पूरी करे। धार्मिक और वास्तु मान्यताओं में पूजा के दौरान बैठने के तरीके को भी महत्व दिया गया है।
ईशान कोण में रखें पूजा की थाली
रक्षाबंधन की पूजा की थाली रखने के लिए उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण को शुभ माना जाता है। वास्तु में इस दिशा को पूजा और सकारात्मक ऊर्जा के लिए विशेष माना गया है। यदि घर में ईशान कोण में जगह उपलब्ध न हो, तो किसी साफ और शांत स्थान पर थाली रखकर भी राखी की रस्म पूरी की जा सकती है।
शुभ भावना सबसे ज्यादा जरूरी
रक्षाबंधन पर दिशा और पूजा से जुड़े इन वास्तु नियमों को धार्मिक एवं वास्तु मान्यताओं के रूप में देखा जाता है। सबसे अहम यह है कि भाई-बहन शांत मन और शुभ भावना के साथ यह पर्व मनाएं। प्रेम, विश्वास और अपनापन ही इस त्योहार की सबसे बड़ी खूबसूरती है।
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