जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने केंद्र शासित प्रदेश में अवैध रूप से रह रहे 150 बांग्लादेशी नागरिकों को डिपोर्ट करने की बड़ी कार्रवाई की है। इन सभी प्रवासियों को आगे की प्रक्रिया के तहत पश्चिम बंगाल भेज दिया गया है। यह सख्त कदम गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध प्रवास और डेमोग्राफी में आ रहे बदलावों की जांच के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति के निर्देशों के बाद उठाया गया है।
सर्वे में मिले थे 600 अवैध प्रवासी
अधिकारियों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर पुलिस के सहयोग से पूरे कश्मीर घाटी में एक व्यापक सर्वे कराया गया था, जिसमें लगभग 600 बांग्लादेशी नागरिक गैर-कानूनी तरीके से निवास करते पाए गए थे। चिन्हित किए गए इन लोगों को श्रीनगर पुलिस की देखरेख में बने एक विशेष कैंप में रखा गया था। सोमवार को इनमें से 150 लोगों को भारतीय वायु सेना के एक विशेष विमान के जरिए बागडोगरा ले जाया गया, जहां उन्हें सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों के सुपुर्द कर दिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बांग्लादेशियों के एक अन्य दल को डिपोर्ट करने की प्रक्रिया के तहत बुधवार को बंगाल भेजा जाएगा।
गृह मंत्रालय की हाई लेवल कमेटी का असर
यह पूरी कार्रवाई केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा गठित उस उच्च स्तरीय समिति की पहल का हिस्सा है, जिसे 26 मई को सीमावर्ती इलाकों में गैर-कानूनी प्रवासियों की पहचान और जनसांख्यिकी परिवर्तन के अध्ययन के लिए बनाया गया था। इस समिति का मुख्य उद्देश्य अवैध प्रवास के कारणों का विश्लेषण करना और जनसांख्यिकीय असंतुलन को रोकने के लिए ठोस उपाय सुझाना है। यह समिति गठन के एक वर्ष के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगी।
15 सालों का डेमोग्राफिक डेटा मांगा
गृह मंत्रालय की समिति ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पत्राचार कर पिछले 15 वर्षों का प्रशासनिक और जनसांख्यिकीय डेटा मांगा है। पिछले दो महीनों में भेजी गई चिट्ठियों के माध्यम से समिति ने जिलों, औद्योगिक क्षेत्रों और सीमावर्ती इलाकों में धार्मिक आबादी में आए बदलावों का टाइम-सीरीज डेटा एकत्र करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही 2011 के बाद से आदिवासी क्षेत्रों की धार्मिक संरचना में हुए बदलावों और उभरते रुझानों पर राज्य सरकारों से विस्तृत आकलन रिपोर्ट मांगी गई है।
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