Ganesh Chaturthi 2026: गणेश चतुर्थी भगवान गणेश की आराधना और उनका आशीर्वाद पाने का खास अवसर माना जाता है। यह पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी तक चलता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन 10 दिनों में विधि-विधान से गणपति की पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। इस दौरान बप्पा को उनकी प्रिय वस्तुएं अर्पित करने से विशेष पुण्य मिलता है और परिवार में सुख, शांति व समृद्धि बनी रहती है।
दूर्वा से प्रसन्न होते हैं गणपति बप्पा
भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा का विशेष स्थान है। मान्यता है कि दूर्वा गणपति को बेहद प्रिय है। इसलिए पूजा के दौरान 11 या 21 दूर्वा अर्पित करना शुभ माना जाता है। भक्त चाहें तो दूर्वा की माला भी चढ़ा सकते हैं। दूर्वा की छोटी-छोटी गांठें अर्पित करना भी शुभ माना गया है। श्रद्धा से दूर्वा चढ़ाते हुए ओम गं गं गणपतए नमः का जाप करने से जीवन की बाधाएं दूर होने की मान्यता है।
सिंदूर चढ़ाने से मिलती है शुभता
गणेशजी को लाल सिंदूर प्रिय माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सिंदूर के बिना उनकी पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती। लाल सिंदूर सौभाग्य का प्रतीक है और गणेशजी को शुभता का देवता माना जाता है। पूजा में सिंदूर अर्पित करने से गणपति की कृपा प्राप्त होने और संकट दूर होने की मान्यता है।
मोदक है बप्पा का प्रिय भोग
मोदक को भगवान गणेश का सबसे प्रिय भोग माना जाता है। इसका मीठा स्वाद जीवन में आनंद और प्रसन्नता का प्रतीक माना जाता है। गणपति बप्पा को मोदक का भोग लगाने से वे प्रसन्न होते हैं और भक्तों को बुद्धि व सफलता का आशीर्वाद मिलने की धार्मिक मान्यता है। पूजा के बाद मोदक को प्रसाद के रूप में ग्रहण करना भी शुभ माना जाता है।
गन्ना चढ़ाने से जीवन में मिठास
श्री गणेश पूजा में गन्ना या गन्ने का रस अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे जीवन में मिठास और सुख-समृद्धि आती है। गणेश चतुर्थी पर गन्ने को छीलकर उसके छोटे-छोटे टुकड़े करके भगवान को भोग लगाया जा सकता है। इससे परिवार में मधुरता और सुख-शांति बनी रहने की मान्यता है।
केले का भोग भी माना जाता है शुभ
केला पूजा-पाठ में चढ़ाए जाने वाले प्रमुख फलों में शामिल है। इसे शुभ और सात्विक फल माना जाता है। हिंदू धर्म में केला उन्नति और वैभव का प्रतीक माना जाता है। गणेश चतुर्थी पर गणपति बप्पा को केला अर्पित करते समय इसे हमेशा जोड़े में चढ़ाना शुभ माना गया है।
अक्षत से जुड़ी है पूर्णता की मान्यता
गणेशजी की पूजा में अखंड चावल यानी अक्षत का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा में टूटे हुए चावल की जगह साबुत चावल अर्पित किए जाते हैं। अक्षत को पूर्णता, अखंडता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि गणपति को गीले अक्षत अर्पित करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं।
लाल गुड़हल से करें गणपति बप्पा का श्रृंगार
गणेशजी की पूजा में लाल गुड़हल के फूल का विशेष स्थान माना गया है। इसे समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। गुड़हल का लाल रंग ऊर्जा, शक्ति और मंगल का प्रतीक माना जाता है। गणेश चतुर्थी पर भगवान को ताजे गुड़हल के फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इससे जीवन की अड़चनें दूर होती हैं और नए रास्ते खुलते हैं।
Read More:

