पश्चिम बंगाल(Bengal) में भारत-बांग्लादेश सीमा को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए फेंसिंग का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार के सूत्रों के मुताबिक, फेंसिंग के लिए अधिग्रहित की गई जमीन का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंप दिया गया है। इससे सीमा के कई हिस्सों में लंबे समय से लंबित फेंसिंग परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है।
इससे पहले 22 जुलाई को राज्य सरकार ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) को करीब 1,024.75 एकड़ जमीन उपलब्ध कराने की जानकारी दी थी। यह जमीन पश्चिम बंगाल के नौ सीमावर्ती जिलो-मुर्शिदाबाद, उत्तर 24 परगना, कूचबिहार, मालदा, नदिया, दक्षिण दिनाजपुर, दार्जिलिंग, उत्तर दिनाजपुर और जलपाईगुड़ी-में फेंसिंग के लिए दी गई है। कुल मिलाकर 172.6 किलोमीटर लंबे सीमा क्षेत्र में फेंसिंग के लिए भूमि हस्तांतरित की गई है।
मुर्शिदाबाद और उत्तर 24 परगना में सबसे अधिक काम
जानकारी के मुताबिक, मुर्शिदाबाद जिले में सबसे अधिक 337 एकड़ जमीन दी गई है जहां लगभग 45.4 किलोमीटर सीमा पर फेंसिंग का कार्य किया जाएगा। वहीं, उत्तर 24 परगना में करीब 42.07 किलोमीटर क्षेत्र के लिए 241.03 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई गई है। इससे इन इलाकों में सीमा सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होने की संभावना है।
इसी बीच यह दावा भी किया गया है कि सीमा पर निगरानी और सुरक्षा बढ़ने के बाद एक लाख से अधिक बांग्लादेशी नागरिक पश्चिम बंगाल छोड़ चुके हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
SIR के चलते लोगों को हो सकती है परेशानी
सूत्रों के मुताबिक, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में जिन लोगों का नाम शामिल नहीं हो सका और जिन्होंने दोबारा आवेदन भी नहीं किया, उन्हें भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाई आ सकती है। ऐसे लोगों की संख्या लगभग 20 लाख बताई जा रही है। SIR के तहत मतदाता सूची का काम चल रहा है जिसमें नागरिकों से आवश्यक दस्तावेज और जानकारी मांगी गई थी। जिनकी जानकारी समय पर पूरी नहीं हो सकी उनके नाम सूची में शामिल नहीं किए जा सके।