दिल्ली दंगों में जान गंवाने वाले इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा(Ankit Sharma) के परिवार के लिए अदालत का फैसला भी मन को पूरी तरह राहत नहीं दे सका। कड़कड़डूमा कोर्ट ने इस मामले में ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है लेकिन अंकित के भाई अंकुर शर्मा का कहना है कि उनके परिवार के लिए यह फैसला अधूरे न्याय जैसा है।
उनका मानना है कि जिस तरह की क्रूरता अंकित के साथ हुई उसके मुकाबले यह सजा पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि उनका भाई देश की सेवा करते हुए अपनी जान गंवा बैठा और उसकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकती।
मुजफ्फरनगर से दिल्ली आकर बसा परिवार
मीडिया के साथ बातचीत में अंकुर शर्मा बताते हैं कि उनका परिवार करीब दो दशक पहले उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से दिल्ली आकर बस गया था। उनके पिता गृह मंत्रालय में कार्यरत थे इसलिए परिवार उत्तर-पूर्वी दिल्ली के खजूरी खास इलाके में रहने लगा। दोनों भाइयों ने अपनी पढ़ाई दिल्ली में ही पूरी की। अंकित शर्मा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से शिक्षा हासिल की और बाद में वर्ष 2016 में इंटेलिजेंस ब्यूरो की परीक्षा पास की। 2017 में उन्होंने असिस्टेंट सेंट्रल इंटेलिजेंस ऑफिसर (ACIO) के रूप में सेवा शुरू की। परिवार के मुताबिक, उन्हें जल्द ही प्रमोशन मिलने ही वाला था।

25 फरवरी 2020 बना जिंदगी का सबसे दुखद दिन
अंकुर के मुताबिक, 25 फरवरी 2020 को इलाके में हिंसा और तनाव का माहौल था। उसी दिन अंकित अपने कार्यालय से घर लौटे थे। घर पहुंचने के बाद उन्हें कार्यालय से दोबारा संपर्क किया गया और आसपास की स्थिति की जानकारी लेने के लिए बाहर जाने को कहा गया। परिवार को उस समय अंदाजा भी नहीं था कि घर से निकलते समय हुई यह बातचीत उनकी आखिरी मुलाकात साबित होगी।
रातभर तलाश के बाद अगली सुबह मिला शव
जब देर रात तक अंकित घर नहीं लौटे तो परिवार ने रिश्तेदारों, दोस्तों और अस्पतालों में उनकी तलाश की। बाद में दयालपुर थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई गई। अगले दिन पुलिस ने नाले से अंकित शर्मा का शव बरामद किया।
अंकुर बताते हैं कि उस दृश्य को याद करना आज भी बेहद दर्दनाक है। उनके मुताबिक, शव पर कई गंभीर चोटों के निशान थे और चेहरा भी बेहद बुरी हालत में था।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बढ़ाया परिवार का दर्द
परिवार का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अंकित शर्मा के शरीर पर 51 चोटों का उल्लेख किया गया था। अंकुर का कहना है कि हर बार इस रिपोर्ट को याद करने पर यही सवाल मन में आता है कि किसी व्यक्ति के साथ इतनी बर्बरता कैसे की जा सकती है। उनका कहना है कि इस मामले को “रेयरेस्ट ऑफ द रेयर” मानते हुए दोषियों को मृत्युदंड मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि परिवार और दिल्ली पुलिस इस मामले में आगे हाईकोर्ट का रुख करने की तैयारी कर रहे हैं। साथ ही जिन आरोपियों को बरी किया गया है उनके खिलाफ भी अपील की जाएगी।

दर्द इतना गहरा कि घर भी छोड़ना पड़ा
इस घटना के बाद परिवार को सुरक्षा तो मिली लेकिन मानसिक पीड़ा कम नहीं हुई। अंकुर बताते हैं कि जिस घर में वे रहते थे वहां की हर गली और हर कोना अंकित की याद दिलाता था। सबसे ज्यादा तकलीफ उस रास्ते से गुजरने पर होती थी जहां से कुछ ही दूरी पर उनका शव मिला था। यही वजह रही कि परिवार ने वह घर छोड़ दिया और दूसरी जगह रहने लगा। आज भी उनके माता-पिता इस सदमे से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं और अक्सर बीमार रहते हैं।



