गुजरात के राजकोट जिले में लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। ग्रामीण स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की टीम ने एक विशेष अभियान के तहत बिना किसी वैध मेडिकल डिग्री और मान्यता प्राप्त प्रमाण पत्र के मरीजों का इलाज कर रहे 17 फर्जी डॉक्टरों को धर दबोचा है। पकड़े गए आरोपियों में से 14 ऐसे लोग हैं जिनकी शैक्षणिक योग्यता केवल 10वीं, 11वीं या 12वीं तक ही है। इसके बावजूद ये सभी आरोपी अपने क्लिनिक चलाकर मरीजों को दवाइयां दे रहे थे और यहां तक कि इंजेक्शन भी लगा रहे थे, जिससे आम जनता की जान पर बड़ा खतरा मंडरा रहा था।
बिना योग्यता के सालों से चला रहे थे क्लिनिक
पुलिस जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं कि पकड़े गए 17 आरोपियों में से 3 केवल 10वीं पास, 3 ग्रेजुएट, 8 बारहवीं पास और 3 आरोपी 11वीं तक पढ़े हुए हैं। इनमें से कुछ आरोपी पिछले 20 से 25 वर्षों से अवैध रूप से क्लिनिक चला रहे थे, जबकि बाकी आरोपी एक से सात साल या पिछले कुछ महीनों से इस गैरकानूनी धंधे में सक्रिय थे। चौंकाने वाली बात यह है कि ये सभी आरोपी पहले अस्पतालों, क्लिनिकों या मेडिकल स्टोर्स पर कंपाउंडर या सहायकों के रूप में काम कर चुके थे, और उसी अनुभव के दम पर खुद को चिकित्सक बताकर सर्दी, बुखार और खांसी जैसी बीमारियों का इलाज कर रहे थे।
अलग-अलग इलाकों में हुई छापेमारी और सामान जब्त
राजकोट जिला ग्रामीण पुलिस प्रमुख विजयसिंह गुर्जर के अनुसार, ग्रामीण SOG की टीमों ने पूरे जिले में एक साथ छापेमारी कर यह कार्रवाई की। पाटनवाव से दो, जसदन से तीन, जेतपुर तालुका, शापर और जेतपुर शहर से दो-दो, तथा कोटडासांगाणी, मेटोडा GIDC, पडधरी, गोंडल तालुका, जेतपुर उद्योगनगर और जामकंडोरणा से भी आरोपियों को पकड़ा गया है। पुलिस ने इन फर्जी डॉक्टरों के क्लिनिकों से मेडिकल उपकरण और अन्य सामग्री समेत कुल 3,05,229 रुपये मूल्य का सामान जब्त किया है।
मेडिकल प्रैक्टिस एक्ट के तहत मामला दर्ज और जांच जारी
पुलिस की शुरुआती जांच में स्पष्ट हुआ है कि किसी भी आरोपी के पास एलोपैथिक चिकित्सा करने के लिए सरकार से मान्यता प्राप्त जरूरी डिग्री या लाइसेंस नहीं था। पुलिस ने सभी 17 आरोपियों के खिलाफ मेडिकल प्रैक्टिस एक्ट-30 के तहत मामले दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके अलावा, पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इन फर्जी डॉक्टरों ने अब तक कितने लोगों का इलाज किया है और इनके पास किस तरह की दवाइयां थीं। जिला प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जिले में अन्य संदिग्ध क्लिनिकों की पहचान कर इस अभियान को आगे भी जारी रखा जाएगा।
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