प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2026 में भारत की मेजबानी में आयोजित हो रहे ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन को लेकर एक संस्कृत श्लोक साझा करते हुए वैश्विक कल्याण की प्रतिबद्धता दोहराई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया है कि यह दो दिवसीय महासम्मेलन सकारात्मक, सार्थक और वैश्विक भलाई को समर्पित चर्चाओं का साक्षी बनेगा।
अगले कुछ दिनों में दुनियाभर के नेता BRICS Summit के लिए जुटेंगे। पूर्ण विश्वास है कि सम्मेलन में विश्व कल्याण की कामना के साथ विभिन्न मुद्दों पर सकारात्मक और सार्थक चर्चा होगी।
सद्भिरेव सहासीत सद्भिः कुर्वीत सङ्गतिम्।
सद्भिर्विवादं मैत्रीं च नासद्भिः किंचिदाचरेत्॥ pic.twitter.com/YG36WlpiYg
— Narendra Modi (@narendramodi) September 11, 2026
पीएम मोदी और पुतिन की अहम द्विपक्षीय वार्ता
शिखर सम्मेलन के औपचारिक आगाज से ठीक पहले शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक तय की गई है। इस उच्चस्तरीय वार्ता में रणनीतिक व्यापारिक मजबूती, सीमा पार भुगतान प्रणालियों (cross-border payment mechanisms) को सुगम बनाने और ऊर्जा सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी। इसके अलावा, पूर्वी यूरोप और पश्चिम एशिया में जारी वैश्विक तनावों के शांतिपूर्ण समाधान के मार्गों पर भी दोनों नेताओं के बीच विचार-विमर्श होने की उम्मीद है।
पुतिन का संबोधन और दिग्गजों का जमावड़ा
क्रेमलिन द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 11 सितंबर को ब्रिक्स बिजनेस फोरम के पूर्ण सत्र को संबोधित करेंगे। यह फोरम पारंपरिक रूप से मुख्य शिखर सम्मेलन से पहले आयोजित किया जाता है, जो सदस्य देशों के व्यापारिक प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाता है। शनिवार से शुरू होने वाले दो दिवसीय मुख्य शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत दुनिया भर के कई प्रमुख राष्ट्राध्यक्ष हिस्सा लेंगे।
भारत की अध्यक्षता और केंद्रीय विषय
वर्ष 2026 में भारत चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। इस वर्ष भारत ने “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और निरंतरता का निर्माण” (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) को अपना मुख्य विषय (Theme) चुना है। यह विषय भारत के उस दृष्टिकोण को दर्शाता है जिसमें विकास, पर्यावरण संरक्षण और नई तकनीकों को प्राथमिकता दी गई है। इसके जरिए भारत का लक्ष्य संस्थागत प्रभावशीलता को बढ़ाते हुए ग्लोबल साउथ (ग्लोबल साउथ/विकासशील देशों) की आकांक्षाओं को वैश्विक मंच पर मजबूती से उठाना है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में ब्रिक्स का महत्व
उभरती हुई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक नीतियों में समन्वय स्थापित करने के लिए ब्रिक्स एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। यह संगठन न केवल बहुपक्षीय मंचों पर विकासशील देशों के हितों की पैरवी करता है, बल्कि विकास, वित्त, प्रौद्योगिकी, व्यापार और जन-संपर्क जैसे क्षेत्रों में मील का पत्थर साबित हो रहा है। भारत के नेतृत्व में यह मंच समाधान-उन्मुख रणनीतियों के साथ दुनिया के सामने एक सकारात्मक विकल्प पेश कर रहा है।
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